भगवत् जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ सातवें दिवस | जयपुर | 31 जनवरी 2026
भगवत् जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव के सातवें दिन, 31 जनवरी 2026, को भी मानसरोवर स्थित हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड, शिप्रा पथ वीटी रोड, जयपुर में प्रतिदिन की भांति प्रातःकाल से ही धर्ममय वातावरण व्याप्त रहा। जैन अनुयायियों ने श्रद्धा भाव से मंडल जी की प्रदक्षिणा कर पांडु शिला पर विराजमान प्रभु का पावन अभिषेक संपन्न किया।
प्रभु शरण में आकर भक्तों के हृदय में अपार आनंद और उल्लास छा गया। अभिषेक के उपरांत सौभाग्यशाली जिनेन्द्र भक्तों ने वृद्धि मंत्रों के मध्य प्रभु की शांतिधारा कर विश्व में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगल कामना की। शांतिधारा के पश्चात भक्ति में मग्न भक्तों ने प्रभु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए अर्घ समर्पित किए।
प्रभु भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में मंत्रोच्चार के साथ श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य अर्पित किए। “जय अजित, जय संभव, जय अभिनंदन, जय सुमति, जय पद्म, जय पार्श्वनाथ” जैसे जयघोषों से संपूर्ण पांडाल गूंज उठा। इसी क्रम में भक्तगणों ने पूज्य गुरुवर के साथ णमोकार मंत्र सहित अन्य पावन मंत्रों का सामूहिक जाप कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
तदोपरांत कार्यक्रम स्थल पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री वासुदेव देवनानी जी का आगमन हुआ। उनकी उपस्थिति में चतारी मंगलम एवं शरणागति मंत्रों का सामूहिक पाठ संपन्न हुआ, जिससे वातावरण अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक बन गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को परम पूज्य आचार्य श्री 108 शशांक सागर जी महाराज एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज की मंगल वाणी श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूज्य आचार्यश्री ने जीवन को बोझ नहीं, बल्कि बोधपूर्वक जीने का संदेश देते हुए कहा कि जीवन को उत्सव बनाना है तो धर्म, संयम और भक्ति का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषता बताते हुए कहा कि भारत में चित्र की नहीं, चारित्र की पूजा होती है; धनवान की नहीं, धर्मात्माओं और त्यागियों की पूजा होती है।
प्रवचनों में दैनिक जीवन से जुड़ी प्रेरक कथाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हस्तक्षेप, अहंकार और असंयम से जीवन अशांत होता है, जबकि सरलता, विवेक और धर्माचरण से जीवन स्वर्ग समान बन सकता है। आचार्यश्री ने विधान को जीवन का संविधान बताते हुए उसके पालन का आह्वान किया।
माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी जी ने भी संत-महात्माओं के त्याग, तपस्या और संयम की सराहना करते हुए कहा कि साधु-संतों के प्रवचनों से समाज को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि संतों के सान्निध्य और वाणी से जीवन को सही मार्गदर्शन मिलता है।
कार्यक्रम के अगले चरण में समिति पदाधिकारियों द्वारा पधारे हुए महानुभावों का भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। इसके पश्चात पूज्य गुरुवर द्वारा उच्चारित मंत्रों के मध्य श्रावक-श्राविकाओं ने चारित्र शुद्धि विधान के अर्घ्य अर्पित कर ध्वज स्थापना की। विशाल जनसमूह की उपस्थिति इस विधान की महत्ता और श्रद्धा को दर्शा रही थी।
इसी क्रम में भक्तगणों ने श्रद्धापूर्वक चारित्र शुद्धि विधान के अर्घ अर्पित करने के साथ हवन की पवित्र अग्नि में आहुतियाँ अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की। इसी क्रम में चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान के अंतर्गत शनिवार को विश्व कल्याण कामना महायज्ञ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर 1008 हवन कुंडों में विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ पूर्णाहुति दी गई। हवन की पवित्र अग्नि में आहुतियाँ अर्पित कर विश्व में सुख-शांति, समृद्धि एवं सद्भाव की मंगल कामना की गई।
अंत में संघस्थ गुरुमाओं सहित भक्तों ने पूज्य गुरुवरों का पाद प्रक्षालन कर अपने को कृतार्थ माना।
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भास्कर न्यूज | जयपुर | 1 Feb 2026

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भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव
द्वितीय दिवस – 26 जनवरी 2026 | तृतीय दिवस – 27 जनवरी 2026 | चतुर्थ दिवस – 28 जनवरी 2026 | पंचम दिवस – 29 जनवरी 2026 | षष्ठ दिवस– 30 जनवरी 2026 | सप्तम दिवस – 31 जनवरी 2026




