आचार्य कुन्दकुन्द विरचित प्रवचनसार आचारशास्त्र होते हुये भी दर्शनशास्त्र है, यही इसकी विशेषता है। यह ग्रंथ निश्चय और व्यवहार के समन्वय अथवा ज्ञान और क्रिया के मैत्री का प्ररूपक है। यह ग्रंथ मूलत: तीन भागों में विभक्त है-ज्ञान, ज्ञेय और चरणानुयोग (चारित्र)।
एस सुरासुरमणुसिंदवंदिदं धोदघाइकम्ममलं /
पणमामि वड्ढमाणं तित्थं धम्मस्स कत्तारं // 1 //
सेसे पुण तित्थयरे ससव्वसिद्धे विसुद्धसम्भावे /
समणे य णाणदंसणचरित्ततववीरियायारे // 2 //
Pravachanasara is a treatise on ethics and, at the same time, it is also a philosophical text. This is its unique characteristic. The text exemplifies the integration of Nishchaya (the absolute viewpoint) and Vyavahara (the practical viewpoint) or the harmony between knowledge and action. This text is primarily divided into three parts: Jnana (knowledge), Jneya (the knowable), and Charananuyoga (conduct or ethical practice).
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- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -5 , छह द्रव्यो के लक्षण एवम सत् का अर्थ
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -4, द्रव्य का स्वभाव
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -3
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -2 स्वसमय तथा परसमय का स्वरूप
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -1 उत्पादादिका क्षणभेद हटाकर द्रव्यत्व का द्योतन
- प्रवचनसारः गाथा – 93,94 समभाव से शुभउपयोग के साथ धर्म
- प्रवचनसारः गाथा -92 उत्त्पाद व्यय ध्रोव्यात्मा का होना
- प्रवचनसारः गाथा -90,91 सदृश्य अस्तितव का कथन
- प्रवचनसारः गाथा -89 स्वरुप अस्तित्व का वर्णन
- प्रवचनसारः गाथा -88 द्रव्य का लक्षण
- प्रवचनसारः गाथा -87 वस्तु व्यवस्था
- प्रवचनसारः गाथा -86 – पदार्थों का सम्यक द्रव्य गुण
- प्रवचनसारः गाथा -85 – साम्याका धर्मत्व सिद्धि
- प्रवचनसारः गाथा -83,84 – जिनेद्रोक्त अर्थों के श्रद्धांन
- प्रवचनसारः गाथा – 82 – मोह क्षय के उपाय
- प्रवचनसारः गाथा -81 जिनेन्द्र शब्द का विवेचन
- प्रवचनसारः गाथा – 80 – मोह क्षय पर विचार
- प्रवचनसारः गाथा – तप और संयम से सिद्ध हुए ही शुद्ध है|
- प्रवचनसारः गाथा -79 शुद्ध आत्मा के शत्रु, मोह का स्वाभाव व प्रकार
- प्रवचनसारः गाथा – 77, 78 – कथंचित् पाप और पुण्य में समानता
- प्रवचनसारः गाथा -76 – इन्द्रियाँ सुख पराधीन
- प्रवचनसारः गाथा – 74, 75 शुभ और अशुभ की विशेषता
- प्रवचनसारः गाथा -72, 73 पुण्य का फल
- प्रवचनसार गाथा – 70,71 शुभोपयोग का फल
- प्रवचनसारः गाथा -69 शुभोपयोग के लक्षण
- प्रवचनसारः गाथा – अरिहंत, सिद्ध भगवान के गुण
- प्रवचनसारः गाथा -67,68 – आत्मा की परिपूर्णता
- प्रवचनसारः गाथा -65,66 – क्या शरीर में सुख है?
- प्रवचनसारः गाथा -64 सुख और दुःख का स्वभाव
- प्रवचनसारः गाथा – 62,63 – क्या आप भव्य हैं?
- प्रवचनसारः गाथा – 61 – ज्ञेय अनुरूप ज्ञान
- प्रवचनसारः गाथा -59, 60 – दुख का कारण ज्ञान/मन की आकुलता
- प्रवचनसारः गाथा -57, 58 इन्द्रियाँ परद्रव्य हैं
- प्रवचनसारः गाथा -56 – इन्द्रियों के विषय
- प्रवचनसारः गाथा -54, 55 मूर्तिक और अमूर्तिक पदार्थ का स्वभाव
- प्रवचनसारः गाथा -53 ज्ञान और सुख की महिमा
- प्रवचनसारः गाथा – 50, 51, 52 क्षायिक ज्ञान , क्षयोपशम ज्ञान
- प्रवचनसारः गाथा -49- भगवान की सर्वज्ञता
- प्रवचनसारः गाथा -47, 48 क्षायिक ज्ञान और केवलज्ञान
- प्रवचनसारः गाथा -45, 46 तीर्थंकर अरिहंत भगवान की विशेषताएँ
- प्रवचनसारः गाथा -43, 44 ज्ञान ज्ञेय रूप परिणमन कैसे करता है? |
- प्रवचनसारः गाथा – 41, 42 अतीन्द्रिय ज्ञान की विशेषताएँ
- प्रवचनसारः गाथा – 39, 40 केवलज्ञान
- प्रवचनसारः गाथा -38 पर्याय एवं द्रव्य
- प्रवचनसारः गाथा -37 पर्याय का अर्थ
- प्रवचनसारः गाथा -36 ज्ञान का स्वभाव
- प्रवचनसारः गाथा -34, 35 ज्ञान के श्रुत
- प्रवचनसारः गाथा -32, 33 श्रुत केवली भगवान का स्वरूप
- प्रवचनसारः गाथा -30, 31 ज्ञेय पदार्थो मे ज्ञान प्रवर्तता
- प्रवचनसारः गाथा -28, 29 ज्ञेय और ज्ञायक संबंध
- प्रवचनसारः गाथा -26, 27 आत्मा और ज्ञान के एकत्व-अन्यत्व
- प्रवचनसारः गाथा -23, 24, 25 आत्मा, ज्ञान, ज्ञेय का सम्बंध
- प्रवचनसारः गाथा -21, 22 केवल ज्ञान का स्वरूप
- प्रवचनसारः गाथा -19, 20, अरिहंतभगवान का स्वरूप
- प्रवचनसारः गाथा -18 पदार्थ की पर्याय का उत्पाद और व्यय
- प्रवचनसारः गाथा -16,17 सर्वज्ञता एवं षट्कार्य की व्यवस्था , शुद्धोपयोग का फल
- प्रवचनसारः गाथा -14, 15
- प्रवचनसारः गाथा -12, 13
- प्रवचनसारः गाथा -10, 11
- प्रवचनसारः गाथा -8, 9
- प्रवचनसारः गाथा -7
- प्रवचनसारः गाथा -6
- प्रवचनसारः गाथा -3, 4, 5
- प्रवचनसारः गाथा -1, 2
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