2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा
(मुनयानन्द की चाल)
विनय सब धर्म को मूल जानो सही, विनय बिन धर्म विधि सकल निष्फल कही। जान इमि थापना थाप यहाँ भायजी, विनय सम्पन्नता जजों मन लाय जी।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम् ।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम् ।
नीर गंगातनो, निर्मल लाइयो, कनकझारी विषै, धार शुभ पाइये। पूजिये विनयतैं विनयभावन सही, तासफल निर्मलो, होय उर जिन कही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
लाबनो चन्दना, नीर घसवाइये, रतन पातर विर्षे धार गुन गाइये। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, तासफल चार-गति-पाप विनसे सही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा। खंडबिन ऊजरे, मुकतफल से कहे, तन्दुला थाल भर, आपने कर लहे। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, तासतें खय फाल, होय जिनधुनि कही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
देवतरुके भले, फूल शुभ आनिये, माल बहु गूँज उर, भक्ति मन ठानिये । पूजिये विनयतें, विनयभावन सही, तासफल कामजुर, नाशहो इमि कही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा।
भेलि षट्-रसा, नैवेद्य करनो भलो, भक्तिभावन किये, थाल में धर चलो। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, भूख की वेदना नाश तासफल रही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै नैवेद्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
दीपमणि रतन के, ज्योति तम नाशजी, कनक भरि थाल ले, आरती भासजी। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, नाश अज्ञान कर ज्ञान प्रगटे मही।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै दीपम् निर्वपामीति स्वाहा।
धूपबन्ही विर्षे अगर को जारिये, गन्ध महा सुभग धर हाथ निज धारिये। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, आठ कर्मदहन होय वानि जिन इमिकही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै धूपम् निर्वपामीति स्वाहा।
सुभग फल लाय नारेल बादाम जी, आदि खारक घने, महाशोभ ठामजी। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, मोक्षफल सो करे, पूजिफल धुनि कही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै फलम् निर्वपामीति स्वाहा।
नीर गन्ध अखत पुष्प, लेय चरु दीप जी, धूप फल अर्घ्य तें कर्म सब टीप जी। पूजिये विनयतें विनयभावन सही, तासफल पूज्यपद, लहे निश्चय कही।।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
प्रत्येकार्घ्य
(अडिल्ल छन्द)
पढ़ें विनयतें पाठ विनयतें जो सुने, धरे विनयतें पुस्तक पुट्ठा शुभ ठने। अक्षर चांदी कनक लिखावे सारजी, विनयसार शुभज्ञान तनों अधिकारजी।।
ॐ ह्रीं श्री ज्ञानविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
दरशन शुद्ध सरधान, देखनों जानिये, अवलोकन गुणसार, विनयते आनिये। श्रद्धा दृढ़ उरमांहि, विनय सो सारजी, विनयसार शुभज्ञान तनों अधिकारजी ।।
ॐ ह्रीं श्री दर्शन विनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
जतन समिति का करे, गुपति पाले भलो, महावरत शुध करे, विनययुत सब मिलो । करे जतनतें सोय, विनय विधि है सही, चारित त्रयदश सार जजों विधिर्ते मही।।
ॐ ह्रीं श्री चारित्र विनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
यथायोग्य सब ठाम, विनय सबको करे, देव धर्म गुरु सार, भली धुति उच्चरे। पूजे चाव कराय, भाव शुभ लायजी, सो उपचार सु विनय, महा सुखदायजी।
ॐ ह्रीं श्री उपचारविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
विनय चार परकार, और बहुभेद है, पूजें जो मन लाय, भली तिस टेव है। विनय भावना सार, जगत में जानिये, सो पूजे मनलाय, बड़ी गुनखानि ये।। ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
जयमाला
विनयभावना बहु सुखदाई, विनयभाव विन भव भरमाई। धर्ममूल सब विनय है भैया, इमि लखि विनय पूजसिरनैया ।। सोलहकारण में सरदारा, विनयभावना है अघजारा। विनय सकलको है सुख दैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया।। विनयभाव गुरु का जो कीजे, तो शुभ होय पाप सब छीजे। विनय थकी सबने सुख पैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया ।। विनय मानगिरिहरण प्रचण्डा, वज्रदण्ड सम है बलचण्डा। अविनय वन को बन्ही भैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया ।। जगमें विनयधर्म परधाना, विनय सर्व का राखे माना। विनय जिसाबल्लभनहिं भैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया ।। तातें विनयभाव उर लावो, तो सब जग में महिमा पावो। सबमें विनय मुकतिगुन दैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया ।। विनय सकल दोषन को खोवे, विनय मानमल को धो देवे। विनय ज्ञानतरु को पय पैया, इति लखि विनय पूज सिरनैया। कीजे विनय देव गुरु केरा, वृष की विनय हरे भवफेरा। विनय थकी जग विनय करैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया ।। विनयभाव ताके उर जागे, जा उर कुटिलभाव नहिं लागे। विनयभाव सब दोष हरैया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया। विनय आदि बहुतक गुणकारी, सबविध मंगल विनयउचारी। तातें और धनी क्या कहिया, इमि लखि विनय पूज सिरनैया। तीर्थकर पद करन को, समरथ बहु सुखदाय। भवदधि तारण नावसी, विनयभावना भाय ।।
ॐ ह्रीं श्री विनय भावनायै पूर्णार्ध्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
English Meaning with Transliteration
Vinaya Sampannatā Bhāvanā Pūjā (Worship of the Feeling of Humility & Reverence)
Verse 1
विनय सब धर्म को मूल जानो सही,
विनय बिन धर्म विधि सकल निष्फल कही।
जान इमि थापना थाप यहाँ भायजी,
विनय सम्पन्नता जजों मन लाय जी।।
Transliteration:
Vinaya sab dharm ko mūl jāno sahī,
Vinaya bin dharm vidhi sakal niṣphal kahī।
Jān imi thāpanā thāp yahāṃ bhāyajī,
Vinaya sampannatā jajon man lāy jī।।
Meaning:
Know that humility is truly the foundation of all religion.
Without humility, all religious practices are declared fruitless.
Therefore, establish this truth firmly in your heart,
and cultivate the noble feeling of humility with full devotion.
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्।
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावना । अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
Transliteration:
Om hrīṁ śrī Vinaya-sampannatā Bhāvanā । Atra avatar avatar saṁvauṣaṭ āhvānanam।
Om hrīṁ śrī Vinaya-sampannatā Bhāvanā । Atra tiṣṭha tiṣṭha ṭhaḥ ṭhaḥ sthāpanam।
Om hrīṁ śrī Vinaya-sampannatā Bhāvanā । Atra mama sannihito bhava bhava vaṣaṭ sannidhāpanam।
Meaning:
- O Divine feeling of Humility, I invoke You, please descend here.
- O Divine feeling of Humility, please remain established here.
- O Divine feeling of Humility, please be present near me always.
नीर गंगातनो, निर्मल लाइयो,
कनकझारी विषै, धार शुभ पाइये।
पूजिये विनयतैं विनयभावन सही,
तासफल निर्मलो, होय उर जिन कही।।
Transliteration:
Nīr gaṅgātano, nirmal lāiyo,
Kanak-jhārī viṣai, dhār śubh pāiye।
Pūjiye vinayatain vinay-bhāvan sahī,
Tās-phal nirmalo, hoy ur Jin kahī।।
Meaning:
I offer pure, holy water, as if from the sacred Ganga,
poured through a golden vessel in an auspicious stream.
Worship performed with humility and the feeling of reverence
bears the purest fruit, as proclaimed by the Jinas.
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
लाबनो चन्दना, नीर घसवाइये, रतन पातर विर्षे धार गुन गाइये।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, तासफल चार-गति-पाप विनसे सही।।
Transliteration:
Lābano candanā, nīr ghasvāiye,
Ratan pātar virṣhe dhār guṇ gāiye।
Pūjiye vinayatain vinay-bhāvan sahī,
Tās-phal chār-gati-pāp vinase sahī।।
Meaning:
Fragrant sandalwood paste, rubbed with water, I offer in jeweled vessels,
while singing praises of virtues.
With humility in worship and the pure feeling of reverence,
the fruits are great—the destruction of sins and freedom from rebirth in four destinies.
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
खंडबिन ऊजरे, मुकतफल से कहे,
तन्दुला थाल भर, आपने कर लहे।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही,
तासतें खय फाल, होय जिनधुनि कही।।
Transliteration:
Khaṇḍ-bin ūjare, mukat-phal se kahe,
Tandulā thāl bhar, āpne kar lahe।
Pūjiye vinayatain vinay-bhāvan sahī,
Tāsaten khay phāl, hoy Jin-dhuni kahī।।
Meaning:
I offer whole, unbroken rice grains—symbols of purity and liberation—
filling a tray and presenting them with my own hands.
With humility and the right spirit of reverence,
this offering leads to auspicious fruits, as declared by the Jinas.
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
देवतरुके भले, फूल शुभ आनिये, माल बहु गूँज उर, भक्ति मन ठानिये ।
पूजिये विनयतें, विनयभावन सही, तासफल कामजुर, नाशहो इमि कही।।
Transliteration:
Devataruke bhale, phool shubh āniye, māl bahu gūñj ur, bhakti man ṭhāniye.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, tāsphal kāmajur, nāshaho imi kahi.
Meaning:
Bring auspicious flowers from the divine tree, string garlands with devotion and fix your mind in worship.
With humility and reverence, perform this sacred contemplation, whose fruit destroys lust and worldly passions.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा।
भेलि षट्-रसा, नैवेद्य करनो भलो, भक्तिभावन किये, थाल में धर चलो।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, भूख की वेदना नाश तासफल रही।।
Transliteration:
Bheli shaṭ-rasā, naivedya karno bhalo, bhaktibhāvan kiye, thāl meñ dhar chalo.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, bhūkh kī vedanā nāsh tāsphal rahī.
Meaning:
Prepare food of six tastes, offer it with devotion in a tray.
Through reverent worship, the pain of hunger is destroyed — this is the fruit of humility.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै नैवेद्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
दीपमणि रतन के, ज्योति तम नाशजी, कनक भरि थाल ले, आरती भासजी।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, नाश अज्ञान कर ज्ञान प्रगटे मही।
Transliteration:
Dīpamaṇi ratan ke, jyoti tam nāshajī, kanak bhari thāl le, ārati bhāsajī.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, nāsh ajñān kar jñān pragaṭe mahī.
Meaning:
Offer a jeweled lamp, whose flame removes darkness; bring a golden plate filled for the shining āratī.
With humility, worship sincerely — ignorance is dispelled, and true knowledge shines forth.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै दीपम् निर्वपामीति स्वाहा।
धूपबन्ही विर्षे अगर को जारिये, गन्ध महा सुभग धर हाथ निज धारिये।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, आठ कर्मदहन होय वानि जिन इमिकही।।
Transliteration:
Dhūpabanhī virṣe agar ko jāriye, gandh mahā subhag dhar hāth nij dhāriye.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, āṭh karmadahan hoy vāṇi jin imikahi.
Meaning:
Burn fragrant incense of agarwood, spread its divine fragrance with your own hands.
Through humble worship, all eight karmas are destroyed — so declare the words of the Jina.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै धूपम् निर्वपामीति स्वाहा।
सुभग फल लाय नारेल बादाम जी, आदि खारक घने, महाशोभ ठामजी।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, मोक्षफल सो करे, पूजिफल धुनि कही।।
Transliteration:
Subhag phal lāy nārel bādām jī, ādi khārak ghane, mahāshobh ṭhāmajī.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, mokṣphal so kare, pūjiphal dhuni kahi.
Meaning:
Bring auspicious fruits — coconuts, almonds, dates, and many more, making the altar glorious.
By worshiping with humility, one attains the supreme fruit of liberation — so declare the holy scriptures.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै फलम् निर्वपामीति स्वाहा।
नीर गन्ध अखत पुष्प, लेय चरु दीप जी, धूप फल अर्घ्य तें कर्म सब टीप जी।
पूजिये विनयतें विनयभावन सही, तासफल पूज्यपद, लहे निश्चय कही।।
Transliteration:
Nīr gandh akhat pushp, ley charu dīp jī, dhūp phal arghya ten karm sab ṭīp jī.
Pūjiye vinayatẽ, vinayabhāvan sahī, tāsphal pūjyapad, lahe niśchay kahi.
Meaning:
Offer water, fragrance, rice-grains, flowers, lamp, incense, fruits, and sacred arghya.
Through humble worship, the fruit obtained is the supreme worshipful state (pūjyapad) — surely so is declared.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री विनयसम्पन्नता भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
प्रत्येकार्घ्य
ज्ञान विनय (Reverence for Knowledge)
पढ़ें विनयतें पाठ… अक्षर चांदी कनक लिखावे सारजी।
👉 Meaning: Studying, listening, or writing scriptures with reverence grants the wealth of true knowledge.
Mantra: ॐ ह्रीं श्री ज्ञानविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
दर्शन विनय (Reverence for Right Vision)
दरशन शुद्ध सरधान, देखनों जानिये…
👉 Meaning: Seeing with pure faith and respect strengthens the foundation of right vision.
Mantra: ॐ ह्रीं श्री दर्शनविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
चारित्र विनय (Reverence for Conduct)
जतन समिति का करे…
👉 Meaning: Observing vows, discipline, and right conduct with humility leads to purity of character.
Mantra: ॐ ह्रीं श्री चारित्रविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
उपचार विनय (Reverence in Devotional Services)
यथायोग्य सब ठाम…
👉 Meaning: In every devotional service — to Deva, Dharma, and Guru — humility is the essence.
Mantra: ॐ ह्रीं श्री उपचारविनय भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा Shilavratesvanatichara Bhavana Puja
1. दर्शनविशुद्धि भावना पूजा | प्रत्येकार्घ्य | जयमाला | 2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा | 3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा | 4. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग भावना पूजा | 5. संवेग भावना पूजा | 6. त्याग भावना पूजा | 7. तपो भावना पूजा | 8. साधुसमाधि भावना पूजा | 9. वैयावृत्य भावना पूजा | 10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा | 11. आचार्यभक्ति भावना पूजा | 12. बहुश्रुतभक्ति भावना पूजा | 13 प्रवचनभक्ति भावना पूजा | 14. षट् आवश्यक भावना पूजा | 15. मार्गप्रभावना भावना पूजा | 16 प्रवचनवात्सल्य भावना पूजा | समुच्चय जयमाला