वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव
श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, खीरिया – दिनांक : 9–10 नवंबर 2025
9 नवंबर 2025 – महोत्सव दिवस 1
कलश यात्रा एवं मंडप शुद्धि
महोत्सव का शुभारंभ सुबह 8:00 बजे भव्य कलश यात्रा से हुआ। महिलाओं ने घट उठाकर शोभायात्रा निकाली और मंडप शुद्धि हेतु पवित्र जल का उपयोग किया।भगवान पार्श्वनाथ को पालकी में विराजमान कर बैंड-बाजों के साथ मुख्य कार्यक्रम स्थल पर लाया गया, जहाँ सभी भक्तों ने अभिषेक एवं शांतिधारा का लाभ लिया।
याग-मंडल विधान
प्रातःकालीन शांतिधारा एवं अभिषेक के पश्चात् श्रद्धालुओं की पावन उपस्थिति में याग-मंडल विधान का शुभारंभ हुआ। भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति, मंगलाचरण एवं आचार्य-वंदना के साथ विधिवत् पूजन प्रारंभ किया गया।
विधान में नौ वलयों वाला भव्य याग-मंडल सजाया गया था, जिसमें विविध रंगों से निर्मित पवित्र आकृतियाँ, शुभ चिह्न एवं मंडल अलंकरण ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। पवित्र वेदी पर 245 अर्घ्य धूप, दीप, अक्षत, पुष्प, फल और जल से भावपूर्वक अर्पित किए गए।
याग-मंडल विधान
श्री शांतिनाथ मंडल विधान
दोपहर 2:30 बजे से मंदिर प्रांगण में श्री शांतिनाथ भगवान का भव्य मंडल विधान आरंभ हुआ। शंखनाद, जयघोष और मंगल ध्वनियों के साथ इंद्रों द्वारा मंत्रोच्चारण करते हुए विधान की शुरुआत की गई। वेदी के समक्ष विविध रंगों के पवित्र मंडल सजाए गए, जिनमें 120 मंत्रात्मक अर्घ्य क्रमशः चढ़ाए गए।
वास्तु देवता विधान
श्री शांतिनाथ मंडल विधान की पूर्णाहुति के पश्चात् सायंकाल 4:30 बजे से मंदिर प्रांगण में वास्तु देवता विधान का आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं विधि-विधानपूर्वक किया गया।
कार्यक्रम स्थल पर 7×7 के 49 समान खाने बनाए गए, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के संतुलन, दिशाओं की पवित्रता तथा देवताओं के स्थायित्व का प्रतीक थे। प्रत्येक खाने में अलग-अलग वास्तु देवताओं का आह्वान कर अर्घ्य, पुष्प, अक्षत, धूप और दीप से पूजन किया गया।
वास्तु देवता विधान का महत्व
यह विधान मंदिर, मंडप और सम्पूर्ण परिसर की ऊर्जा, स्थिरता और शुभता के लिए किया जाता है।
इसमें वास्तु पुरुष को पवित्र भाव से आमंत्रित कर निवेदन किया जाता है कि —
“हे देव! यह स्थान धर्म–आराधना और साधना के लिए निर्मित हुआ है,
यहाँ सदैव शांति, पवित्रता और मंगल प्रवाह बना रहे।”
पूजन के समय महिलाएँ और विद्वान वेदियों के चारों ओर बैठकर मंत्रोच्चारण करते रहे। वातावरण में धूप और हवन की सुगंध फैलते ही समग्र स्थल दिव्य आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा।
🔥 हवन एवं पूर्णाहुति
वास्तु विधान के उपरांत मंगल हवन का आयोजन हुआ।
हवन कुंड में पंडित जी के निर्देशन में घृत एवं हवन सामग्री से आहुतियाँ अर्पित की गईं।
प्रत्येक आहुति के साथ श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से “स्वाहा” उच्चारित किया और शांति, आरोग्य, सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
हवन की पूर्णाहुति के समय वातावरण में जय जय शांतिनाथ प्रभु और जय पार्श्वनाथ भगवान के जयघोष गूँज उठे।
अग्नि की लपटों में जब घृत की आहुतियाँ अर्पित की गईं, तब ऐसा प्रतीत हुआ मानो सभी जीवों के क्लेश और कष्ट उस अग्नि में विलीन हो रहे हों और स्थान पर केवल शांति और पवित्रता का वास हो गया हो।
आरती एवं भक्ति संध्या
संध्याकाल में 6:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर भगवान पार्श्वनाथ की भव्य आरती संपन्न हुई। दीपों की ज्योति से सारा परिसर आलोकित हो उठा।
इसके पश्चात भक्ति संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बालक–बालिकाओं, महिला मंडल एवं भजन मंडली ने मधुर भजनों द्वारा भक्तिभाव का वातावरण निर्मित किया —
“जय जय शांतिनाथ प्रभु, त्रिभुवन तारण हार…”
“पार्श्व प्रभु तेरे चरणों में, सबका उद्धार हुआ…”
भक्ति के स्वर, आरती की लौ, और धर्म भावना के कंपन से सम्पूर्ण स्थल धर्ममय, भावमय और प्रकाशमय बन गया।
दूसरा दिवस –📅 दिनांक : 10 नवंबर 2025
अभिषेक एवं शांतिधारा
महोत्सव के दूसरे दिवस का शुभारंभ प्रभात बेला 6:30 बजे में भगवान पार्श्वनाथ के महामंगल अभिषेक से हुआ।
शुद्ध जल, पंचामृत और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का अभिषेक कर भक्तों ने अपार आनंद की अनुभूति की।
इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने शांतिधारा का लाभ लिया — यह भावना करते हुए कि यह जल उनके अंतःकरण को भी पवित्र करे।
पूरे परिसर में “श्री पार्श्वनाथ भगवान की जय” के मंगल जयघोष गुंजायमान हुए।
श्री कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान
अभिषेक के पश्चात 8:00 बजे पूर्णमती माताजी द्वारा रचित श्री कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान का शुभारंभ हुआ।
विधान में भगवान की स्तुति, धर्म की महिमा और कल्याण भावना से युक्त श्लोकों का पाठ हुआ।
इस विधान में कुल 44 अर्घ्य भक्तिपूर्वक अर्पित किए गए।
मंदिर में मंत्रोच्चारण, पुष्प, धूप और दीप की आभा से वातावरण पूर्णतः दिव्य बन गया।
इस विधान का भाव था — “आत्मकल्याण एवं कर्म निर्जरा द्वारा सम्यक जीवन की प्रतिष्ठा।”
🔥 हवन का आयोजन
विधान की पूर्णाहुति के पश्चात मंगल हवन का आयोजन हुआ।
हवन कुंड में पंडित जी के निर्देशन में घृत, एवं हवन सामग्री की आहुतियाँ अर्पित की गईं।
मंत्रोच्चारण और “स्वाहा” की गूंज के साथ पूरा स्थल आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा।
हवन का उद्देश्य – सर्वजन मंगल, शांति और कल्याण की कामना रहा।
🚩 11:30 बजे – शोभायात्रा एवं मंदिर प्रवेश
हवन की पूर्णाहुति के उपरांत भगवान पार्श्वनाथ की भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई।
भगवान को सिर पर विराजमान कर पालकी में बड़े भक्तिभाव से नए मंदिर तक ले जाया गया।
रास्ते में बैंड-बाजों, पुष्पवृष्टि, जयघोषों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण मंगलमय बन गया।
भगवान के मंदिर प्रवेश के क्षणों में सभी श्रद्धालु भावविभोर होकर “जय पार्श्व प्रभु” का जयघोष करने लगे।
🏹 दोपहर 12:50 बजे – शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण
भगवान के मंदिर प्रवेश के उपरांत दोपहर 12:50 बजे मंदिर के शिखर पर कलश और ध्वज का शुभ आरोहण किया गया।
आचार्यगणों के निर्देशन में विधिवत पूजन कर सुवर्ण कलश को शिखर पर स्थापित किया गया तथा ध्वज पताका फहराई गई।
उस क्षण वातावरण में शंखनाद, जयघोष और पुष्पवृष्टि से अपूर्व दिव्यता छा गई।
यह क्षण सम्पूर्ण महोत्सव का परम मंगल क्षण बना —
जब मंदिर का शिखर भगवान पार्श्वनाथ की उपस्थिति से आलोकित हुआ,
और समस्त श्रद्धालुओं के हृदयों में आनंद, भक्ति और गौरव की लहर दौड़ गई।
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