भगवत् जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ पंचम दिवस | जयपुर | 29 जनवरी 2026
वृहद् चारित्र शुद्धि विधान – उपवास, मंत्र-साधना और आत्म-जागरण का महापर्व
भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के पंचम दिवस चारित्र शुद्धि विधान अपने चरम आध्यात्मिक उत्कर्ष पर दृष्टिगोचर हुआ। इस पावन अवसर पर पूज्य अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने अनुष्ठान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उपवास के आध्यात्मिक, मानसिक एवं आत्मिक महत्व को अत्यंत प्रभावशाली शब्दों में रेखांकित किया।
चारित्र शुद्धि विधान का उद्देश्य और वैज्ञानिक आधार
पूज्य गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि — “जीवन में नाना प्रकार के दोष चारित्र में अनजाने ही प्रवेश कर जाते हैं। उन दोषों की शुद्धि हेतु 1234 चारित्र शुद्धि व्रत एक अद्भुत साधना-पथ है।”
उन्होंने बताया कि—
- पाँच महाव्रत
- पाँच समितियाँ
- तीन गुप्तियाँ
इनमें लगने वाले सूक्ष्म दोषों के परिमार्जन हेतु यह चारित्र शुद्धि विधान साधु-साध्वी ही नहीं, गृहस्थ जीवन के लिए भी
प्रेरणा और दिशा प्रदान करता है।
महातपस्वी संत का सान्निध्य – पुण्य का उदय
गुरुदेव ने यह भी कहा कि— “ऐसे वर्तमान काल के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी संत के सान्निध्य में विधान करना निश्चित रूप से उपस्थित जनसमूह के पुण्य का उदय है।”
उन्होंने शिखरजी में 557 दिन की उत्कृष्ट सिंह निष्क्रियत व्रत तपस्या, 496 दिन उपवास और मौन साधना का उल्लेख करते हुए गुरु-सान्निध्य की शक्ति को रेखांकित किया।
विशाल सहभागिता और अनुकरणीय संकल्प
25 से 31 जनवरी तक चल रहे इस महाविधान में 5700 से अधिक जिनेन्द्र भक्तों की उपस्थिति रही।
गुरुदेव ने प्रति माह 7 तारीख को एक उपवास का संकल्प सभी को करवाया तथा बताया कि—
मंत्र-साधना : आत्मा को स्पर्श करता अनुशासन
पंचम दिवस की विशेषता रही
णमोकार मंत्र एवं चतारी मंगल मंत्र की
सामूहिक साधना।
पूज्य गुरुदेव ने बताया—
- चतारी मंगल मंत्र एक ऐसा अद्भुत मंत्र है जिसके एक पाठ से सम्पूर्ण द्वादश अंगों की वंदना का फल प्राप्त होता है
- 9 बार पाठ → णमोकार मंत्र जप का फल
- 27 बार पाठ → एकासन का फल
- 54 बार पाठ → एक उपवास का फल
- 108 बार पाठ → तीर्थराज सम्मेद शिखरजी यात्रा का फल
भक्तों ने 24 घंटे में कम से कम 9 बार मंत्र-पाठ का दृढ़ संकल्प लिया। आचार्य श्री की चुटकी: “ताली बजाने से फल नहीं मिलेगा, करने से मिलेगा। अगर एक दिन 9 बार पढ़ना भूल जाओ, तो अगले दिन प्रायश्चित स्वरूप 108 बार पढ़ना—फिर तुम्हारे ‘बाप’ भी नहीं भूल पाएंगे!”
समिति पूजा और गुप्ति पूजा
ईर्या समिति (देखकर चलना), भाषा समिति (मीठा बोलना) और मन-वचन-काय गुप्ति के दोषों को दूर करने के लिए विशेष मंत्रोच्चार किए गए। मंत्रोच्चार, भजनों और भाव-विभोर वातावरण के मध्य श्रावक-श्राविकाओं ने—
- मंडल पर अर्घ्य अर्पित किए
- जयमाला अर्पण की
- ध्वज स्थापना की
- नृत्य एवं भक्ति भाव से
प्रभु आराधना की
हर अर्घ्य के गुणार्थ को आत्मसात करते हुए भक्त स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली अनुभव कर रहे थे।
पंचम दिवस का संदेश
चारित्र शुद्धि विधान
के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि — “चारित्र की शुद्धि ही आत्मा की मुक्ति का प्रथम द्वार है।”




