सोलह कारण विधान – कविवर श्री टेकचंद जी कृत
8. साधुसमाधि भावना पूजा
दोहा
जा विध मुनि को सुख बढ़े, साधु समाधि सुजान। सो मैं इत थापन करों, पूजों मन वच आन ।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम् ।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना । अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम् ।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना । अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम् ।
(चौपाई छन्द)
नीर निरमले गंगा तनो, सो मैं कनकझारि ले घनो। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल मिटे कर्म को दाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा। बावन चन्दन नीर घसाय, रतन जडित झारी धर लाय। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल भव आताप नशाय ।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा। अक्षत उज्ज्वल मोती समा, सुभग रकेबी में धर रमा। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताके फल अक्षयपद पाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा। फूल भले सुरतरुके लाय, गूंथी माल भक्ति मन लाय। पूर्जा साधुसमाधी-भाव, ताफल मदननाश का पाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा। बहुविध रस नैवेद्य बनाय, उज्जवल पातर ले हरषाय। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल क्षुधानास को पाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै नैवेद्यम् निर्वपामीति स्वाहा। दीपक मणिमय थाल भराय, मनवचतन करि भक्ति बढ़ाय। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल नाशे मिथ्या दाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै दीपम् निर्वपामीति स्वाहा। धूप जु दसविध गन्ध मिलाय, अग्नि विर्षे खेऊं मनभाय। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल अष्टकर्म-क्षय जाय।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै धूपम् निर्वपामीति स्वाहा। श्रीफल लोंग बदाम अपार, खारक आदि और फल सार। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल सिद्धिथान-फल पाव।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै फलम् निर्वपामीति स्वाहा। जल चन्दन अक्षत सुमलेय, चरु अरु दीप धूप फल जेय। पूजों साधुसमाधी-भाव, ताफल अद्भुत फल उपजाय ।।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
प्रत्येकाध्यै (चौपाई छन्द)
मूलगुणों में जो अतिचार, लागे जाहि यती कों सार। सो पुलाक मुनि सातादाय, साधुसमाधि जजों सुखदाय ।।
English Meaning with Transliteration
Sādhu-Samādhi Bhāvanā Pūjā
Opening Verse
Transliteration:
Jā vidh muni ko sukh baḍhe, sādhu-samādhi sujān।
So maiṁ ita thāpan karoṁ, pūjoṁ mana-vaca ān॥
English Meaning:
In whichever way the happiness of monks increases,
So do I establish here the Sādhu-Samādhi Bhāvanā Pūjā, worshipping with mind and speech.
Mantras:
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्।
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधिभावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
Verse 1 – Offering of Water (जल अर्पण)
Transliteration (Chaupāī Chhand):
Nīra niramale gaṅgā tano, so maiṁ kanaka-jhāri le ghano।
Pūjoṁ sādhu-samādhī-bhāv, tāphal miṭe karma ko dāv॥
English Meaning:
I bring the pure waters of the holy Ganga in a golden vessel.
With this, I worship the Sādhu-Samādhi Bhāvanā,
By whose fruit, the fire of karma is extinguished.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 2 – Offering of Sandal (चंदन अर्पण)
Transliteration:
Bāvan candana nīra ghasāya, ratan-jaḍita jhāri dhar laya।
Pūjoṁ sādhu-samādhī-bhāv, tāphal bhava-ātāp naśāya॥
English Meaning:
I prepare sandal paste with pure water,
And offer it in a jewel-studded vessel.
I worship the Sādhu-Samādhi Bhāvanā,
By whose fruit, the burning miseries of worldly life are destroyed.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 3 – Offering of Rice/Grains (अक्षत अर्पण)
Transliteration:
Akṣata ujjvala motī samā, subhaga rakhebī meṁ dhar ramā।
Pūjoṁ sādhu-samādhī-bhāv, tāke phal akṣaya-pada pāva॥
English Meaning:
I offer shining rice grains, bright like pearls,
Placed in a beautiful dish with devotion.
I worship the Sādhu-Samādhi Bhāvanā,
By whose fruit one attains the imperishable state of liberation.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री साधुसमाधि-भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
9. वैयावृत्य भावना पूजा Vaiyavrtya Bhavana Puja
1. दर्शनविशुद्धि भावना पूजा | प्रत्येकार्घ्य | जयमाला | 2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा | 3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा | 4. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग भावना पूजा | 5. संवेग भावना पूजा | 6. त्याग भावना पूजा | 7. तपो भावना पूजा | 8. साधुसमाधि भावना पूजा | 9. वैयावृत्य भावना पूजा | 10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा | 11. आचार्यभक्ति भावना पूजा | 12. बहुश्रुतभक्ति भावना पूजा | 13 प्रवचनभक्ति भावना पूजा | 14. षट् आवश्यक भावना पूजा | 15. मार्गप्रभावना भावना पूजा | 16 प्रवचनवात्सल्य भावना पूजा | समुच्चय जयमाला