विश्व शान्ति महायज्ञ चारित्र शुद्धि विधान | जयपुर | 25–31 जनवरी 2026
अनंत ज्ञान के आलोक से लोक को प्रकाशित करने वाले, अहिंसा, सत्य और करुणा के दिव्य संदेशवाहक
जिन शासन के आराध्य—भगवान जिनेन्द्र देव को समर्पित एक अनुपम आध्यात्मिक अनुष्ठान…
जहाँ श्रद्धा साधना का रूप लेती है और साधना से शान्ति का सृजन होता है, ऐसे ही एक विराट आध्यात्मिक महोत्सव में सहभागी बनने का सौभाग्य जयपुरवासियों को प्राप्त हो रहा है। जब श्रद्धा, साधना और संकल्प एक साथ प्रकट होते हैं, तब कोई साधारण आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक महोत्सव जन्म लेता है। ऐसा ही एक दिव्य अवसर जयपुर की पुण्य भूमि पर साकार हो रहा है—
📍 आयोजन स्थल एवं अवधि
🗓 25 जनवरी से 31 जनवरी 2026 द्वितीय दिवस | तृतीय दिवस | चतुर्थ दिवस | पंचम दिवस | षष्ठ दिवस | सप्तम दिवस
📌 मानसरोवर स्थित हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड, शिप्रा पथ, वीटी रोड, जयपुर
इन सात दिनों में जयपुर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहेगा, जहाँ हजारों श्रद्धालु एक साथ जिनवाणी, जिनभक्ति और जिनशासन की आराधना में लीन होंगे।
🌟 पावन सान्निध्य एवं निर्देशन
इस विराट आयोजन का सौभाग्यपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है—
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर जी महाराज
जिनका जीवन स्वयं त्याग, तप और करुणा का जीवंत उदाहरण है।
सौम्य मूर्ति उपाध्याय श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज
के कुशल निर्देशन में यह महोत्सव निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।
🚩 मंगल विहार एवं पावन यात्रा
25 जनवरी 2026, प्रातः बेला में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान प्रभु के दर्शन-वंदन उपरांत पूज्य गुरुवर संघ सहित मंगल विहार करते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर प्रस्थान किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, गगनभेदी जयकार, और भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालुओं का उत्साह— इस पावन यात्रा को अविस्मरणीय बना रहा था।
“मुनि की हो रही जय-जयकार…” नगर की राहों में उमड़ी श्रद्धा की धारा
ज्यों-ज्यों गुरुवर के श्री चरण आगे बढ़ते गए, श्रद्धालुओं की संख्या और भक्ति—दोनों निरंतर बढ़ती गईं।
🏳️ ध्वजारोहण एवं पांडाल उद्घाटन
कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने के पश्चात— प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी तरुण भैया जी इंदौर के निर्देशन में पुण्यवान जिनेन्द्र भक्तों द्वारा ध्वजारोहण संपन्न हुआ।
इसके पश्चात पूज्य गुरुवरों की मंगल उपस्थिति में पांडाल का विधिवत उद्घाटन कर कार्यक्रम को गति प्रदान की गई।
🌺 जैनेश्वरी दीक्षा – आत्मोत्थान का महासंस्कार
कार्यक्रम की एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक कड़ी में—
क्षुल्लक श्री 105 नैगमसागर जी महाराज एवं क्षुल्लिका श्री 105 व्रत प्रभा माता जी ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में श्रीफल अर्पित कर जैनेश्वरी दीक्षा हेतु निवेदन किया।
क्षमा-याचना, वैराग्य, समस्त जीवों से क्षमाभाव—
एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय जीवों तक सबसे क्षमा मांगते हुए यह क्षण आत्मा को भीतर तक स्पर्श कर गया।
आचार्य श्री का सान्निध्य इस महोत्सव को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला अनुभव बना देता है। उनके प्रवचन, मार्गदर्शन और आशीर्वचन श्रद्धालुओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन का कारण बनते हैं।
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पत्रिका न्यूज 26 Jan 2026 जयपुर
भगवत जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान शुरू ‘अशांत दुनिया का समाधान जैन मूल्यों में’
भगवान महावीर के बाद जैन धर्म के प्रमुख व्रत सिंह निष्क्रीडित व्रत के अंतर्गत 557 दिन की लगातार मौन साधना सहित अन्य तप करने वाले आचार्य प्रसन्न सागर ससंघ के सान्निध्य में रविवार से मानसरोवर वीटी रोड स्थित मैदान में आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ की शुरुआत हुई। इस मौके पर दो जैनेश्वरी दीक्षाएं भी दी गईं।
अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जयपुर प्रवास समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद जैन और महामंत्री विनोद जैन ने बताया कि मीरा मार्ग जैन मंदिर से लवाजमे के साथ जुलूस, शोभायात्रा निकली। जुलूस के मुख्य संयोजक राकेश गोधा ने बताया कि शोभायात्रा में 12 तीर्थकरों की प्रतिमाओं के साथ श्रद्धालु बग्घियों में शामिल हुए। समाजसेवी अनिल, मीना जैन ने झण्डारोहण कर शुभारंभकिया। समाजसेवी ज्ञान चन्द पंकज झांझरी ने मंडप का उदघाटन किया। ने मंडप का उदघाटन कियार क्षुल्लिका व्रतप्रभा को क्रमशः मुनि और आर्यिका के रूप में दीक्षा प्रदान की। कोषाध्यक्ष कैलाश चंद छाबड़ा ने बताया कि आचार्य ससंघ के सानिध्य में 13 वर्ष बाद हो रहे 1008 चारित्र महामण्डल विधान, विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान में सैकड़ों महिला पुरुषों ने भाग लिया। उपाध्याय पीयूष सागर ने भी आशीर्वचन दिए। पूर्व उपमहापौर पुनीत कर्णावट, महावीर यही सिद्धांत विश्व शांति की नींव है।
दिगम्बर उमराव मल जैन संधी, शिक्षा मानद परिषद मंत्री के अध्यक्ष सुनील बख्शी, अशोक जैन, प्रदीप जैन, मनीष बैद, भारतभूषण जैन, राजेन्द्र सेठी, सूर्य प्रकाश छाबड़ा ने आचार्य से आशीर्वाद लिया।

पहली बार होगा विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर
एक फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर का आयोजन होगा। इसमें 5 से 20 वर्ष के विवाहित जीवन जीने वाले दम्पतियों को वैवाहिक आचरण के बारे में बताते हुए जीवन में सामंजस्य एवं समन्वय स्थापित कर आपसी रिश्ते में मजबूती एवं सफलता के बिन्दु बताए जाएगें।
आचार्य का संदेश
श्रावक-श्राविकाएं भगवान महावीर और भगवान पार्श्वनाथ के बताए मार्ग पर चलें जीवन में अणुव्रतों का पालन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनें सत्य, शौच, संयम, अहिंसा, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य
दीक्षाः मोक्ष पथ की ओर प्रेरणा
जैनेश्वरी दीक्षा संसार की सबसे बड़ी दीक्षा है, यह सीधा मोक्ष मार्ग की ओर ले जाने वाला पुण्यशाली संकल्प है। करोड़ों आवक-आविकाओं में से विरले ही इस मार्ग पर अग्रसर हो पाते हैं। दीक्षा केवल त्याग नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की सर्वोच्च साधना है।
प्रमुख झलकियां
मंडल पर मुख्य मंगल कलश, आत मंगल कलश की विधिवत स्थापना
अखंड दीपक, पंच मेरु और अष्ट जयकारों के बीच प्रतिष्ठित किए गए
श्री बृहत् चारित्रशुद्धि विधान
समुच्चय पूजा | अहिंसा व्रत पूजा | बादर एकेद्रिय पर्याप्तक | सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्तक
Jinvani Television broadcast
Day1 – 25 जनवरी 2026