जैन धर्मं और दर्शन
Front Desk Jainism Forum (FDJF)
भक्तामर स्तोत्र 48 दीपकों के साथ रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से
तत्वार्थ सूत्र (Tattvartha sutra)
अध्याय 1 | अध्याय 2 | अध्याय 3 | अध्याय 4 | अध्याय 5 | अध्याय 6 | अध्याय 7 | अध्याय 8 | अध्याय 9 | अध्याय 10
Ishtopadesh इष्टोपदेश
गाथा 1 (Gatha 1) | गाथा 2 ( Gatha 2 )| गाथा 3 ( Gatha 3)| गाथा 4 ( Gatha 4) | गाथा 5 ( Gatha 5) | गाथा 6 ( Gatha 6 )| गाथा 7 ( Gatha 7 )| गाथा 8 ( Gatha 8 ) | गाथा 9 ( Gatha 9 ) | गाथा 10 ( Gatha 10)| गाथा 11 ( Gatha 11 )| गाथा 12 ( Gatha 12) | गाथा 13 ( Gatha 13 )| गाथा 14 ( Gatha 14 )| गाथा 15 ( Gatha 15 ) | गाथा 16 ( Gatha 16 )| गाथा 17 ( Gatha 17 )| गाथा 18 ( Gatha 18 )| गाथा 19 ( Gatha 19 )| गाथा 20 ( Gatha 20 )| गाथा 21 ( Gatha 21)| गाथा 22 ( Gatha 22 )| गाथा 23 ( Gatha 23 )| गाथा 24 ( Gatha 24 )| गाथा 25 ( Gatha 25 ) | गाथा 26 ( Gatha 26 )| गाथा 27( Gatha 27 ) | गाथा 28 ( Gatha 28 )| गाथा 29 ( Gatha 29 )| गाथा 30 ( Gatha 30 )| गाथा 31 ( Gatha 31)| गाथा 32 | गाथा 33
पुरुषार्थ सिद्धयुपाय Purusharth Siddhi Upay
गाथा 1 | Gatha1 | गाथा 2 | Gatha2 | गाथा 3 | Gatha 3 | गाथा 4 | Gatha 4 | गाथा 5 | Gatha 5 | गाथा 6 | Gatha 6 | गाथा 7 | Gatha 7 | गाथा 8 | Gatha 8 | गाथा 9 | Gatha 9
बारह भावणा ( प्राकृत ) –
अणिच्चभावणा | अरक्खभावणा | भवभावणा | एयत्तभावणा | अण्णभावणा | सरीरभावणा | आसवभावणा | संवरभावणा | णिज्जराभावणा | लोयभावणा | बोहिदुल्लहा भावणा | धम्मभावणा
गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री सुभूषणमति माताजी
गुरु पूर्णिमा महोत्सव इडर गुजरात
जैन मंदिर पूजन सामग्री से पशु आहार बनाने की विधि
भगवज्जिनसेनाचार्य विरचित आदिपुराण Ādi purāṇa by Acharya Jinasena
आदिपुराण पर्व 1 – कथामुखवर्णन पर्व 1 – श्लोक 1 | श्लोक 2 से 15 | श्लोक 16 से 25 | श्लोक 26 से 35 | श्लोक 36 to 45 | श्लोक 46 से 55 | श्लोक 56 से 65 | श्लोक 66 से 75 | श्लोक 76 से 85 | श्लोक 86 से 95 | श्लोक 96 से 105 | श्लोक 106 से 116 | श्लोक 117 से 126 | श्लोक 127 से 136 | श्लोक 137 से 146 | श्लोक 147 से 156 | श्लोक 157 से 166 | श्लोक 167 से 171 | श्लोक 172 से 180 | श्लोक 181 से 190 | श्लोक 191 से 200 | श्लोक 201 से 210
आदिपुराण पर्व 2 – कथामुखवर्णन पर्व 2 – श्लोक 1 से 10 | श्लोक 11 से 20 | श्लोक 21 से 30 | श्लोक 31 से 40 | श्लोक 41 से 50 | श्लोक 51 से 60 | श्लोक 61 से 70 | श्लोक 71 से 80 | श्लोक 81 से 95 | श्लोक 96 से 105 | श्लोक 106 से 115 | श्लोक 116 से 125 | श्लोक 126 से 135 | श्लोक 136 से 145 | श्लोक 146 से 155 | श्लोक 156 से 162
आदिपुराण पर्व 3 – पीठिकावर्णन पर्व 3 – श्लोक 1 से 10 | श्लोक 11 से 20 | श्लोक 21 से 30 | श्लोक 31 से 40 | श्लोक 41 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 124 | श्लोक 125 से 138 | श्लोक 139 से 151 | श्लोक 152 से 163 | श्लोक 164 से 171 | श्लोक 172से 183 | श्लोक 184 से 192 | श्लोक 193 से 201 | श्लोक 202 से 212 | श्लोक 213 से 221 | श्लोक 222 से 239
आदिपुराण पर्व 4 – श्रीमहाबलाभ्युदयवर्णन पर्व 4 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 152 | श्लोक 153 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 198
आदिपुराण पर्व 5 – ललितांग स्वर्गभोग वर्णन पर्व 5 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 175 | श्लोक 176 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 292 | श्लोक 293 से 296
आदिपुराण पर्व 6 – ललितांगदेव का स्वर्ग से च्युत होने आदि का वर्णन पर्व 6 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 133 | श्लोक 134 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 208
आदिपुराण पर्व 7 – श्रीमती और वज्रजंघ के समागम का वर्णन पर्व 7 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 41 | श्लोक 42 से 54 | श्लोक 55 से 71 | श्लोक 72 से 82 | श्लोक 83 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 173 | श्लोक 174 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 318
आदिपुराण पर्व 8 – श्रीमती और वज्रजंघ के पात्रदान का वर्णन
पर्व 8 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 82 | श्लोक 83 से 91 | श्लोक 92 से 104 | श्लोक 105 से 118 | श्लोक 119 से 135 | श्लोक 136 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 184 | श्लोक 185 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 252 | श्लोक 253 से 257
आदिपुराण पर्व 9– श्रीमती और वज्रजंघ आर्य को सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति का वर्णन
पर्व 9 श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 20 | श्लोक 21 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 195
आदिपुराण पर्व 10 –श्रीमान् अच्युतेंद्र के ऐश्वर्य का वर्णन पर्व 10 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 208
आदिपुराण पर्व 11 – श्री भगवान वज्रनाभि के सर्वार्थसिद्धिगमन का वर्णन पर्व 11 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 142 | श्लोक 143 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221
आदिपुराण पर्व 12 – भगवान के स्वर्गावतरण का वर्णन पर्व 12 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 153 | श्लोक 154 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 273
आदिपुराण पर्व 13 – भगवान के जन्माभिषेक का वर्णन पर्व 13 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 216
आदिपुराण पर्व 14 – भगवज्जातकर्मोत्सव वर्णन पर्व 14 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 209 | श्लोक 210 से 213
आदिपुराण पर्व 15 – भगवान का कुमारकाल, यशस्वती और सुनंदा का विवाह तथा भरत की उत्पत्ति का वर्णन पर्व 15 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 44 | श्लोक 45 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 224
आदिपुराण पर्व 16 – भगवान् के साम्राज्य का वर्णन पर्व 16 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 93 | श्लोक 94 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 192 | श्लोक 193 से 208 | श्लोक 209 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 275
आदिपुराण पर्व 17 – भगवान् के तप-कल्याणक का वर्णन पर्व 17 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 257
आदिपुराण पर्व 18 – धरणेंद्र का विजयार्ध पर्वत पर जाना आदि का वर्णन पर्व 18 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 202 | श्लोक 203 से 209
आदिपुराण पर्व 19 – नमि-विनमि की राज्यप्राप्ति का वर्णन पर्व 19 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 192
आदिपुराण पर्व 20 – भगवान के कैवल्योत्पत्ति का वर्णन पर्व 20 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 183 | श्लोक 184 से 193 | श्लोक 194 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 253 | श्लोक 254 से 261 | श्लोक 262 से 273
आदिपुराण पर्व 21 – ध्यानतत्त्व का वर्णन पर्व 21 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 64 | श्लोक 65 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 95 | श्लोक 96 से 111 | श्लोक 112 से 120 | श्लोक 121 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 191 | श्लोक 192 से 205 | श्लोक 206 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 242 | श्लोक 243 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 268
आदिपुराण पर्व 22 – समवसरण का वर्णन पर्व 22 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 316
आदिपुराण पर्व 23 – समवसरणविभूति का वर्णन पर्व 23 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 196
आदिपुराण पर्व 24 – भगवत्कृत धर्मोपदेश का वर्णन पर्व 24 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 172 | श्लोक 173 से 181 | श्लोक 182 से 186
आदिपुराण पर्व 25 – भगवान के विहार का दर्शन करने वाला पर्व 25 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 110 | श्लोक 111 से 121 | श्लोक 122 से 132 | श्लोक 133 से 143 | श्लोक 144 से 155 | श्लोक 156 से 167 | श्लोक 168 से 178 | श्लोक 179 से 190 | श्लोक 191 से 203 | श्लोक 204 से 217 | श्लोक 218 से 231 | श्लोक 232 से 244 | श्लोक 245 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 290
आदिपुराण भाग – 2
आदिपुराण पर्व 26 – भरतराज की दिग्विजय के उद्योग का वर्णन
पर्व 26 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 128 | श्लोक 129 से 147 | श्लोक 148 से 150
आदिपुराण पर्व 27 – भरतराज का राजाओं की विजय के लिये प्रयाण का वर्णन
पर्व 27 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 152
आदिपुराण पर्व 28 – पूर्व समुद्र के द्वार को विजय करने का वर्णन
पर्व 28 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221
आदिपुराण पर्व 29 – दक्षिण समुद्र के द्वार के विजय करने का वर्णन वाला
पर्व 29 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 66 | श्लोक 67 से 81 | श्लोक 82 से 90 | श्लोक 91 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 169
आदिपुराण पर्व 30 – पश्चिम समुद्र के द्वारका विजय वर्णन
पर्व 30 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 34 | श्लोक 35 से 50 | श्लोक 51 से 63 | श्लोक 64 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 129
आदिपुराण पर्व 31 – विजयार्ध पर्वत की गुफा का द्वार उघाड़ने का वर्णन
पर्व 31 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 159
आदिपुराण पर्व 32 -उत्तरार्ध भरत की विजय का वर्णन
पर्व 32 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 130 | श्लोक 131 से 141 | श्लोक 142 से 154 | श्लोक 155 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 199
आदिपुराण पर्व 33 – भरतराज का कैलाश पर्वत पर जाने का वर्णन
पर्व 33 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 27 | श्लोक 28 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 123 | श्लोक 124 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 164 | श्लोक 165 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 202
आदिपुराण पर्व 34 – भरतराज के छोटे भाइयों की दीक्षा का वर्णन
पर्व 34 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 223
आदिपुराण पर्व 35 – कुमार बाहुबली के युद्ध का उद्योग वर्णन
पर्व 35 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 44 | श्लोक 45 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 249
आदिपुराण पर्व 36 – बाहुबली का जल-युद्ध, मल्ल-युद्ध और नेत्र-युद्ध में विजय प्राप्त करना, दीक्षा धारण करना, और केवलज्ञान उत्पन्न होनेका वर्णन
पर्व 36 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 212
आदिपुराण पर्व 37 – भरतेश्वर के वैभव का वर्णन
पर्व 37 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 190 | श्लोक 191 से 201 | श्लोक 202 से 205
आदिपुराण पर्व 38 – द्विजों की उत्पत्ति तथा गर्भान्वय क्रियाओं का वर्णन
पर्व 38 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 63 | श्लोक 64 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 223 | श्लोक 224 से 231 | श्लोक 232 से 240 | श्लोक 241 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 293 | श्लोक 294 से 303 | श्लोक 304 से 313
आदिपुराण पर्व 39 – दीक्षान्वय और कर्त्रन्वय क्रियाओं का वर्णन
पर्व 39 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211
आदिपुराण पर्व 40 – द्विजों की उत्पत्ति में क्रियामन्त्रों का वर्णन
पर्व 40 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 23 | श्लोक 24 से 31 | श्लोक 32 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 142 | श्लोक 143 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 223
आदिपुराण पर्व 41 – भरतराज के स्वप्न तथा उनके फल का वर्णन
पर्व 41 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 158
आदिपुराण पर्व 42 – भरतराज की वर्णाश्रम की रीति का प्रतिपादन करने वाला
पर्व 42 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 192 | श्लोक 193 से 201 | श्लोक 202 से 208
आदिपुराण पर्व 43 – सुलोचनाके स्वयंवरका वर्णन
पर्व 43 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 46 | श्लोक 47 से 69 | श्लोक 70 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 213 | श्लोक 214 से 221 | श्लोक 222 से 232 | श्लोक 233 से 242 | श्लोक 243 से 251 | श्लोक 252 से 264 | श्लोक 265 से 275 | श्लोक 276 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 | श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 339
आदिपुराण पर्व 44 – जयकुमार की विजय का वर्णन
पर्व 44 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 103 | श्लोक 104 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 152 | श्लोक 153 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 191 | श्लोक 192 से 203 | श्लोक 204 से 212 | श्लोक 213 से 221 | श्लोक 222 से 232 | श्लोक 233 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 322 | श्लोक 323 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 352 | श्लोक 353 से 361 | श्लोक 362 से 367
आदिपुराण पर्व 45 – जय-कुमार और सुलोचना के सुखभोग का वर्णन
पर्व 45 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 103 | श्लोक 104 से 113 | श्लोक 114 से 123 | श्लोक 124 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 152 | श्लोक 153 से 160 | श्लोक 161 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 219
आदिपुराण पर्व 46 – जयकुमार और सुलोचना के भवान्तर वर्णन
पर्व 46 – श्लोक 1 से 13 | श्लोक 14 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 40 | श्लोक 41 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 100 | श्लोक 101 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 170 | श्लोक 171 से 181 | श्लोक 182 से 194 | श्लोक 195 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 232 | श्लोक 233 से 241 | श्लोक 242 से 255 | श्लोक 256 से 271 | श्लोक 272 से 286 | श्लोक 287 से 296 | श्लोक 297 से 313 | श्लोक 314 से 322 | श्लोक 323 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 361 | श्लोक 362 से 369
आदिपुराण पर्व 47 – प्रथम तीर्थंकर और प्रथम चक्रवर्ती का वर्णन
पर्व 47 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 30 | श्लोक 31 से 45 | श्लोक 46 से 64 | श्लोक 65 से 108 | श्लोक 109 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 163 | श्लोक 164 से 171 | श्लोक 172 से 183 | श्लोक 184 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 223 | श्लोक 224 से 232 | श्लोक 233 से 241 | श्लोक 242 से 252 | श्लोक 253 से 273 | श्लोक 274 से 283 | श्लोक 284 से 303 | श्लोक 304 से 321 | श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 342 | श्लोक 343 से 354 | श्लोक 355 से 371 | श्लोक 372 से 381 | श्लोक 382 से 391 | श्लोक 392 से 403
उत्तरपुराण
गुणभद्राचार्य विरचित उत्तरपुराण पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 | पर्व 54 | पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58 | पर्व 59 | पर्व 60 | पर्व 61
उत्तरपुराण पर्व 48 अजितनाथ तीर्थंकर तथा सगर चक्रवर्तीका वर्णन
पर्व 48 – श्लोक 1 से 8 | श्लोक 9 से 20 | श्लोक 21 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 73 | श्लोक 74 से 84 | श्लोक 85 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 143
उत्तरपुराण पर्व 49 –संभवनाथ तीर्थंकर का पुराण वर्णन
पर्व 49 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 54 | श्लोक 55 से 59
उत्तरपुराण पर्व 50 – श्री अभिनन्दनस्वामी का पुराण वर्णन
पर्व 50 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 53 | श्लोक 54 से 63 | श्लोक 64 से 70
उत्तरपुराण पर्व 51 – सुमतिनाथ तीर्थंकर का पुराण वर्णन
पर्व 51 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 87
उत्तरपुराण पर्व 52 – पद्मप्रभ भगवान् के पुराण का वर्णन
पर्व 52 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 43 | श्लोक 44 से 52 | श्लोक 53 से 64 | श्लोक 65 से 70
उत्तरपुराण पर्व 53 – सुपार्श्वनाथ स्वामीका पुराण का वर्णन
पर्व 53 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 34 | श्लोक 35 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 56
उत्तरपुराण पर्व 54 – चन्द्रप्रभ पुराण का वर्णन
पर्व 54 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 |श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 |श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 173 | श्लोक 174 से 181 | श्लोक 182 से 193 | श्लोक 194 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 272 | श्लोक 273 से 276
उत्तरपुराण पर्व 55
पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) पुराण का वर्णन पर्व 55 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 62
उत्तरपुराण पर्व 56
शीतल पुराण का वर्णन पर्व 56 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 55 | श्लोक 56 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 96
उत्तरपुराण पर्व 57
श्रेयांसनाथ तीर्थकर त्रिष्टष्ठनारायण, विजय बलभद्र और अश्वमीव प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 57 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 62 | श्लोक 63 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 100
उत्तरपुराण पर्व 58
श्री वासुपूज्य जिनेन्द्र, द्विपृष्ठनारायण, अचल बलभद्र और तारक प्रति-नारायण का वर्णन पर्व 58 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 32 | श्लोक 33 से 41 | श्लोक 42 से 53 | श्लोक 54 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 124
उत्तरपुराण पर्व 59
विमलनाथ तीर्थंकर, धर्म, स्वयंभू, मधु, संजयन्त, मेरु और मंदर गणधर का वर्णन पर्व 59 – श्लोक 1 से 13 | श्लोक 14 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 54 | श्लोक 55 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 125 | श्लोक 126 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 |श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 232 | श्लोक 233 से 242 | श्लोक 243 से 252 | श्लोक 253 से 262 | श्लोक 263 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 312 | श्लोक 313 से 319
उत्तरपुराण पर्व 60
अनन्तनाथ तीर्थंकर, सुप्रभ बलभद्र, पुरुषोत्तम नारायण और मधुसूदन प्रति-नारायणके पुराणका वर्णन पर्व 60 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 85
उत्तरपुराण पर्व 61
धर्मनाथ तीर्थकर, सुदर्शन बलभद्र, पुरुषसिंह नारायण, मधुक्रीड़ प्रतिनारायण, मघवा और सनत्कुमार चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 61 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 23 | श्लोक 24 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 90 | श्लोक 91 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 130
उत्तरपुराण पर्व 62
अपराजित बलभद्र और अनन्तवीर्य नारायण के अभ्युदय का वर्णन पर्व 62 – श्लोक 1 से 10 | श्लोक 11 से 21 |श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 61 | श्लोक 62 से 72 | श्लोक 73 से 82 | श्लोक 83 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 |श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 240 | श्लोक 241 से 252 | श्लोक 253 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 283 | श्लोक 284 से 292 | श्लोक 293 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 |श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 363 | श्लोक 364 से 371 | श्लोक 372 से 382 | श्लोक 383 से 390 | श्लोक 391 से 401 | श्लोक 402 से 411 | श्लोक 412 से 421 | श्लोक 422 से 433 | श्लोक 434 से 442 | श्लोक 443 से 451 | श्लोक 452 से 462 | श्लोक 463 से 472 | श्लोक 473 से 481 | श्लोक 482 से 491 | श्लोक 492 से 501 | श्लोक 502 से 513
उत्तरपुराण पर्व 63
शान्तिनाथ तीर्थंकर तथा चक्रवर्ती का पुराण वर्णन पर्व 63 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 |श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 102 | श्लोक 103 से 114 | श्लोक 115 से 121 | श्लोक 122 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 153 | श्लोक 154 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 192 | श्लोक 193 से 201 | श्लोक 202 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 244 | श्लोक 245 से 254 | श्लोक 255 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 293 | श्लोक 294 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 | श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 361 | श्लोक 362 से 371 | श्लोक 372 से 381 | श्लोक 382 से 393 | श्लोक 394 से 404 | श्लोक 405 से 412 | श्लोक 413 से 421 | श्लोक 422 से 431 | श्लोक 432 से 441 | श्लोक 442 से 451 | श्लोक 452 से 462 | श्लोक 463 से 475 | श्लोक 476 से 491 | श्लोक 492 से 501 | श्लोक 502 से 510
उत्तरपुराण पर्व 64
कुन्थुनाथ तीर्थकर तथा चक्रवर्ती का पुराण वर्णन पर्व 64 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 50 | श्लोक 51 से 55
उत्तरपुराण पर्व 65
अरनाथ तीर्थकर चक्रवर्ती, सुभौम चक्रवर्ती, नन्दिषेण बलभद्र, पुण्डरीक नारायण और निशुम्भ प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 65 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 34 | श्लोक 35 से 50 | श्लोक 51 से 64 | श्लोक 65 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 104 | श्लोक 105 से 117 | श्लोक 118 से 131 | श्लोक 132 से 143 | श्लोक 144 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 184 | श्लोक 185 से 192
उत्तरपुराण पर्व 66
मल्लिनाथ तीर्थकर, पद्मचक्रवर्ती, नन्दिमित्र बलदेव, दत्त नारायण और बलीन्द्र प्रति-नारायण के पुराण का वर्णन पर्व 66 – श्लोक 1 से 13 | श्लोक 14 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 42 | श्लोक 43 से 52 | श्लोक 53 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 125
उत्तरपुराण पर्व 67
मुनिसुव्रत तीर्थकर , हरिषेण चक्रवर्ती, राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण और रावण प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 67 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 23 | श्लोक 24 से 33 | श्लोक 34 से 43 | श्लोक 44 से 52 | श्लोक 53 से 64 | श्लोक 65 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 135 | श्लोक 136 से 152 | श्लोक 153 से 162 | श्लोक 163 से 173 | श्लोक 174 से 181 | श्लोक 182 से 192 | श्लोक 193 से 203 | श्लोक 204 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 231 | श्लोक 232 से 242 | श्लोक 243 से 254 | श्लोक 255 से 273 | श्लोक 274 से 281 | श्लोक 282 से 292 | श्लोक 293 से 304 | श्लोक 305 से 321 | श्लोक 322 से 332 | श्लोक 333 से 343 | श्लोक 344 से 353 | श्लोक 354 से 370 | श्लोक 371 से 390 | श्लोक 391 से 401 | श्लोक 402 से 411 | श्लोक 412 से 426 | श्लोक 427 से 443 | श्लोक 444 से 461 | श्लोक 462 से 471 | श्लोक 472 से 473
उत्तरपुराण पर्व 68
राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण, सीता , रावण और अणुमान् के पुराण का वर्णन पर्व 68 – श्लोक 1 से 16 | श्लोक 17 से 30 | श्लोक 31 से 42 | श्लोक 43 से 50 | श्लोक 51 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 104 | श्लोक 105 से 123 | श्लोक 124 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 163 | श्लोक 164 से 174 | श्लोक 175 से 184 | श्लोक 185 से 193 | श्लोक 194 से 203 | श्लोक 204 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 235 | श्लोक 236 से 252 | श्लोक 253 से 262 | श्लोक 263 से 276 | श्लोक 277 से 291 | श्लोक 292 से 302 | श्लोक 303 से 317 | श्लोक 318 से 332 | श्लोक 333 से 353 | श्लोक 354 से 364 | श्लोक 365 से 382 | श्लोक 383 से 401 | श्लोक 402 से 412 | श्लोक 413 से 422 | श्लोक 423 से 435 | श्लोक 436 से 452 | श्लोक 453 से 462 | श्लोक 463 से 472 | श्लोक 473 से 484 | श्लोक 485 से 493 | श्लोक 494 से 501 | श्लोक 502 से 515 | श्लोक 516 से 531 | श्लोक 532 से 542 | श्लोक 543 से 551 | श्लोक 552 से 560 | श्लोक 561 से 575 | श्लोक 576 से 585 | श्लोक 586 से 594 | श्लोक 595 से 604 | श्लोक 605 से 622 | श्लोक 623 से 631 | श्लोक 632 से 641 | श्लोक 642 से 651 | श्लोक 652 से 661 | श्लोक 662 से 672 | श्लोक 673 से 681 | श्लोक 682 से 691 | श्लोक 692 से 701 | श्लोक 702 से 711 | श्लोक 712 से 721 | श्लोक 722 से 732
उत्तरपुराण पर्व 69
नमिनाथ तीर्थंकर तथा जयसेन चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 69 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 65 | श्लोक 66 से 82 | श्लोक 83 से 92
उत्तरपुराण पर्व 70
नेमिनाथ स्वामी के चरित में श्रीकृष्णकी विजय का वर्णन पर्व 70 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 43 | श्लोक 44 से 52 | श्लोक 53 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 83 | श्लोक 84 से 94 | श्लोक 95 से 111 | श्लोक 112 से 124 | श्लोक 125 से 131 | श्लोक 132 से 144 | श्लोक 145 से 153 | श्लोक 154 से 164 | श्लोक 165 से 181 | श्लोक 182 से 202 | श्लोक 203 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 243 | श्लोक 244 से 252 | श्लोक 253 से 273 | श्लोक 274 से 283 | श्लोक 284 से 292 | श्लोक 293 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 | श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 363 | श्लोक 364 से 375 | श्लोक 376 से 392 | श्लोक 393 से 402 | श्लोक 403 से 411 | श्लोक 412 से 421 | श्लोक 422 से 431 | श्लोक 432 से 441 | श्लोक 442 से 455 | श्लोक 456 से 471 | श्लोक 472 से 481 | श्लोक 482 से 491 | श्लोक 492 से 497
उत्तरपुराण पर्व 71
नेमि चरित्र प्रकरण में श्रीकृष्ण, बलदेव, श्रीकृष्णकी पट्टरानियाँ आदि भवान्तरों का वर्णन पर्व 71 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 51 | श्लोक 52 से 64 | श्लोक 65 से 81 | श्लोक 82 से 93 | श्लोक 94 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 130 | श्लोक 131 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 190 | श्लोक 191 से 200 | श्लोक 201 से 213 | श्लोक 214 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 257 | श्लोक 258 से 272 | श्लोक 273 से 282 | श्लोक 283 से 292 | श्लोक 293 से 301 | श्लोक 302 से 315 | श्लोक 316 से 324 | श्लोक 325 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 362 | श्लोक 363 से 372 | श्लोक 373 से 382 | श्लोक 383 से 391 | श्लोक 392 से 403 | श्लोक 404 से 413 | श्लोक 414 से 421 | श्लोक 422 से 431 | श्लोक 432 से 441 | श्लोक 442 से 459 | श्लोक 460 से 462
उत्तरपुराण पर्व 72
नेमिनाथ तीर्थंकर, पद्म नामक बलभद्र, कृष्ण नामक अर्धचक्रवर्ती, जरासन्ध प्रतिनारायण और ब्रह्मदत्त नामक सकल चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 72 – श्लोक 1 से 22 | श्लोक 23 से 34 | श्लोक 35 से 46 | श्लोक 47 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 123 | श्लोक 124 से 141 | श्लोक 142 से 153 | श्लोक 154 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 183 | श्लोक 184 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 234 | श्लोक 235 से 248 | श्लोक 249 से 259 | श्लोक 260 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 288
उत्तरपुराण पर्व 73
पाश्र्वनाथ तीर्थंकर के पुराण का वर्णन पर्व 73 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 24 | श्लोक 25 से 32 | श्लोक 33 से 43 | श्लोक 44 से 53 | श्लोक 54 से 66 | श्लोक 67 से 79 | श्लोक 80 से 92 | श्लोक 93 से 105 | श्लोक 106 से 114 | श्लोक 115 से 124 | श्लोक 125 से 133 | श्लोक 134 से 141 | श्लोक 142 से 152 | श्लोक 153 से 161 | श्लोक 162 से 170
उत्तरपुराण पर्व 74
अन्तिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी, राजा श्रेणिक और अभयकुमार के चरित का वर्णन पर्व 74 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 83 | श्लोक 84 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 143 | श्लोक 144 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 192 | श्लोक 193 से 202 | श्लोक 203 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 232 | श्लोक 233 से 241 | श्लोक 242 से 252 | श्लोक 253 से 261 | श्लोक 262 से 270 | श्लोक 271 से 281 | श्लोक 282 से 293 | श्लोक 294 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 322 | श्लोक 323 से 330 | श्लोक 331 से 342 | श्लोक 343 से 352 | श्लोक 353 से 362 | श्लोक 363 से 372 | श्लोक 373 से 385 | श्लोक 386 से 396 | श्लोक 397 से 413 | श्लोक 414 से 422 | श्लोक 423 से 431 | श्लोक 432 से 440 | श्लोक 441 से 453 | श्लोक 454 से 463 | श्लोक 464 से 475 | श्लोक 476 से 485 | श्लोक 486 से 502 | श्लोक 503 से 513 | श्लोक 514 से 521 | श्लोक 522 से 531 | श्लोक 532 से 542 | श्लोक 543 से 549
उत्तरपुराण पर्व 75
चन्दना आर्यिका और जीवन्धर स्वामीका चरित वर्णन पर्व 75 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 25 | श्लोक 26 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 63 | श्लोक 64 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 94 | श्लोक 95 से 101 | श्लोक 102 से 113 | श्लोक 114 से 122 | श्लोक 123 से 135 | श्लोक 136 से 150 | श्लोक 151 से 162 | श्लोक 163 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 193 | श्लोक 194 से 201 | श्लोक 202 से 212 | श्लोक 213 से 222 | श्लोक 223 से 241 | श्लोक 242 से 250 | श्लोक 251 से 261 | श्लोक 262 से 273 | श्लोक 274 से 290 | श्लोक 291 से 300 | श्लोक 301 से 313 | श्लोक 314 से 321 | श्लोक 322 से 330 | श्लोक 331से 350 | श्लोक 351से 365 | श्लोक 366 से 383 | श्लोक 384 से 391 | श्लोक 392 से 403 | श्लोक 404 से 412 | श्लोक 413 से 423 | श्लोक 424 से 440 | श्लोक 441 से 454 | श्लोक 455 से 472 | श्लोक 473 से 492 | श्लोक 493 से 501 | श्लोक 502 से 512 | श्लोक 513 से 524 | श्लोक 525 से 542 | श्लोक 543 से 552 | श्लोक 553 से 571 | श्लोक 572 से 583 | श्लोक 584 से 602 | श्लोक 603 से 613 | श्लोक 614 से 624 | श्लोक 625 से 631 | श्लोक 632 से 643 | श्लोक 644 से 651 | श्लोक 652 से 663 | श्लोक 664 से 671 | श्लोक 672 से 682 | श्लोक 683 से 691
उत्तरपुराण पर्व 76
राजा श्वेतवाहनके मुनिपद , अन्तिम केवली जम्बू स्वामी, प्रीतिंकर मुनि , उत्सर्पिणी अवसर्पिणी काल का विशिष्ट वर्णन करते हुए कल्कियों का वर्णन , कल्किके पुत्र अजितंजयका , प्रलय काल का वर्णन , आगामी तीर्थकर आदि शलाकापुरुषों का वर्णन , महावीर भगवान् की शिष्य परम्परा पर्व 76 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 20 | श्लोक 21 से 30 | श्लोक 31 से 42 | श्लोक 43 से 64 | श्लोक 65 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 93 | श्लोक 94 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 133 | श्लोक 134 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 183 | श्लोक 184 से 192 | श्लोक 193 से 200 | श्लोक 201 से 213 | श्लोक 214 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 252 | श्लोक 253 से 271 | श्लोक 272 से 283 | श्लोक 284 से 291
द्वादशवर्षीय श्रमण संस्कृति स्वाध्याय – आदिपुराण
द्वादशवर्षीय श्रमण संस्कृति स्वाध्याय – आदिपुराण भाग – 2
आदिपुराण हिन्दी-भाषानुवाद
पर्व 1 |पर्व 2 | पर्व 3 | पर्व 4 | पर्व 5 | पर्व 6 | पर्व 7 | पर्व 8 | पर्व 9 | पर्व 10 | पर्व 11 | पर्व 12 | पर्व 13 | पर्व 14 | पर्व 15 | पर्व 16 | पर्व 17 | पर्व 18 | पर्व 19 | पर्व 20 | पर्व 26 | पर्व 27 | पर्व 28 | पर्व 29 | पर्व 30 | पर्व 31 | पर्व 32 |पर्व 33 | पर्व 34 | पर्व 35 | पर्व 36 | पर्व 37 |पर्व 38 | पर्व 39 | पर्व 40 | पर्व 41 | पर्व 42 |पर्व 43 | पर्व 44 | पर्व 45 | पर्व 46 | पर्व 47
आदिपुराण सारांश
पर्व 1 | पर्व 2 | पर्व 3 | पर्व 4 | पर्व 5 | पर्व 6 | पर्व 7 | पर्व 8 | पर्व 9 | पर्व 10 |पर्व 11 |पर्व 12 | पर्व 13 | पर्व 14 | पर्व 15 | पर्व 16 | पर्व 17 | पर्व 18 | पर्व 19 | पर्व 20 | पर्व 21 | पर्व 22 | पर्व 23 | पर्व 24 | पर्व 25 | पर्व 26 | पर्व 27 | पर्व 28 | पर्व 29 | पर्व 30 | पर्व 31 | पर्व 32 | पर्व 33 |पर्व 34 | पर्व 35 | पर्व 36 | पर्व 37 | पर्व 38 | पर्व 39 | पर्व 40 | पर्व 41 | पर्व 42 | पर्व 43 | पर्व 44 | पर्व 45 | पर्व 46 | पर्व 47
द्वादशवर्षीय श्रमण संस्कृति स्वाध्याय उत्तरपुराण
उत्तरपुराण हिन्दी-भाषानुवाद
पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 | पर्व 54 |पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58
उत्तरपुराण सारांश
पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 |पर्व 54 | पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58
विधान (Vidhan)
श्री शांतिनाथ मण्डल विधान पूजन
Shri Shantinath Mandal Vidhan Pujan
श्री वासुपूज्य विधान – आर्यिका विज्ञानमति माताजी
श्री चन्दप्रभ पूजन विधान – विशदसागरजी महाराज
Front Desk Jainism Forum (FDJF)
- उपयोग , परिणाम और ध्यान से शांति
- इष्टोपदेश – द्वादशवर्षीय श्रमण संस्कृति स्वाध्याय पाठ्यक्रम
- मोक्षमार्ग हड़बड़ी का मार्ग नहीं है।
- भगवान् के दर्शन में आह्लाद भाव ही आपके अन्दर विशुद्धि का भाव पैदा करेगा।
- जिनेन्द्र देव के दर्शन करना श्रावक का प्रथम मूलगुण है।
- मन की एकाग्रता, ध्यान की परिणति कर्म काटने के औजार हैं।
- जैसे पाषाण के अन्दर प्रतिमा छिपी हुई है वैसे ही हमारे अन्दर परमात्मा छिपा है
- स्वभाव की प्राप्ति करने के लिए ‘पर’ की भी कोई आवश्यकता नहीं है।
- आचार्य उस आत्मा को नमस्कार करते हैं जिसने स्वभाव की प्राप्ति कर ली हो।
- समुदघात
- बारह अंगों के नाम-
- दानम दुर्गति नाशय – उपाध्याय श्री 108 वृषभानंद जी मुनिराज प्रवचन 3 aug 2024
- चौंसठ ऋद्धियां
- हंस मानसर भूला
- अपनपौ आपुहि तें बिसरो You’ve forgotten your own soul
- विहरमान बीस तीर्थंकर और उनकी बीस विशेषतायें
- कल्याण मन्दिर स्तोत्र [ रचयिता हिंदी पद पूज्य मुनिश्री प्रणम्य सागरजी ]
- जैनागम में 84 अंक का महत्त्व
- श्री शांतिनाथ मण्डल विधान – प्रतिष्ठाचार्य ब्र. सूरजमल जैन
- निर्वपामीति स्वाहा का अर्थ Meaning of Nirvapamiti Swaha
- प्राकृ्त भाषा सीखे
- कर्म और उसके भेद
- भगवान महावीर के 34 पूर्व भव की कथा
- सिरिभूवलय ग्रन्थ के अनुसार तीर्थकर भगवन्तो के चिन्ह रखने का विवरण
- अष्टमंगल AshtaMangal – दिगंबर जैन परम्परा
- प्रारंभिक मंगलाचरण
- ज्ञान और ज्ञेय संबंध (Relation of Knowledge and Object)
प्रवचनसार
प्रवचनसारः गाथा – 93,94 समभाव से शुभउपयोग के साथ धर्म | गाथा -92 उत्त्पाद व्यय ध्रोव्यात्मा का होना | गाथा -90,91 सदृश्य अस्तितव का कथन | प्रवचनसारः गाथा -89 स्वरुप अस्तित्व का वर्णन | प्रवचनसारः गाथा -88 द्रव्य का लक्षण | प्रवचनसारः गाथा -87 वस्तु व्यवस्था | प्रवचनसारः गाथा -86 – पदार्थों का सम्यक द्रव्य गुण | प्रवचनसारः गाथा -85 – साम्याका धर्मत्व सिद्धि | प्रवचनसारः गाथा -83,84 – जिनेद्रोक्त अर्थों के श्रद्धांन | प्रवचनसारः गाथा – 82 – मोह क्षय के उपाय | प्रवचनसारः गाथा -81 जिनेन्द्र शब्द का विवेचन | प्रवचनसारः गाथा – 80 – मोह क्षय पर विचार | वचनसारः गाथा 84,85 – तप और संयम से सिद्ध हुए ही शुद्ध है| | प्रवचनसारः गाथा -79 शुद्ध आत्मा के शत्रु, मोह का स्वाभाव व प्रकार | प्रवचनसारः गाथा – 77, 78 – कथंचित् पाप और पुण्य में समानता | प्रवचनसारः गाथा -76 – इन्द्रियाँ सुख पराधीन | प्रवचनसारः गाथा – 74, 75 शुभ और अशुभ की विशेषता | प्रवचनसारः गाथा -72, 73 पुण्य का फल | प्रवचनसार गाथा – 70,71 शुभोपयोग का फल | प्रवचनसारः गाथा -69 शुभोपयोग के लक्षण | प्रवचनसारः गाथा – अरिहंत, सिद्ध भगवान के गुण | प्रवचनसारः गाथा -67,68 – आत्मा की परिपूर्णता | प्रवचनसारः गाथा -65,66 – क्या शरीर में सुख है? | प्रवचनसारः गाथा -64 सुख और दुःख का स्वभाव | प्रवचनसारः गाथा – 62,63 – क्या आप भव्य हैं? | प्रवचनसारः गाथा – 61 – ज्ञेय अनुरूप ज्ञान | प्रवचनसारः गाथा -59, 60 – दुख का कारण ज्ञान/मन की आकुलता | प्रवचनसारः गाथा -57, 58 इन्द्रियाँ परद्रव्य हैं | प्रवचनसारः गाथा -56 – इन्द्रियों के विषय | प्रवचनसारः गाथा -54, 55 मूर्तिक और अमूर्तिक पदार्थ का स्वभाव | प्रवचनसारः गाथा -53 ज्ञान और सुख की महिमा | प्रवचनसारः गाथा – 50, 51, 52 क्षायिक ज्ञान , क्षयोपशम ज्ञान | प्रवचनसारः गाथा -49- भगवान की सर्वज्ञता | प्रवचनसारः गाथा -47, 48 क्षायिक ज्ञान और केवलज्ञान | प्रवचनसारः गाथा -45, 46 तीर्थंकर अरिहंत भगवान की विशेषताएँ | प्रवचनसारः गाथा -43, 44 ज्ञान ज्ञेय रूप परिणमन कैसे करता है? | | प्रवचनसारः गाथा – 41, 42 अतीन्द्रिय ज्ञान की विशेषताएँ | प्रवचनसारः गाथा – 39, 40 केवलज्ञान | प्रवचनसारः गाथा -38 पर्याय एवं द्रव्य | प्रवचनसारः गाथा -37 पर्याय का अर्थ | प्रवचनसारः गाथा -36 ज्ञान का स्वभाव | प्रवचनसारः गाथा -34, 35 ज्ञान के श्रुत | प्रवचनसारः गाथा -32, 33 श्रुत केवली भगवान का स्वरूप | प्रवचनसारः गाथा -30, 31 ज्ञेय पदार्थो मे ज्ञान प्रवर्तता | प्रवचनसारः गाथा -28, 29 ज्ञेय और ज्ञायक संबंध | प्रवचनसारः गाथा -26, 27 आत्मा और ज्ञान के एकत्व-अन्यत्व | प्रवचनसारः गाथा -23, 24, 25 आत्मा, ज्ञान, ज्ञेय का सम्बंध | प्रवचनसारः गाथा -21, 22 केवल ज्ञान का स्वरूप | प्रवचनसारः गाथा -19, 20, अरिहंतभगवान का स्वरूप | प्रवचनसारः गाथा -18 पदार्थ की पर्याय का उत्पाद और व्यय | प्रवचनसारः गाथा -16,17 सर्वज्ञता एवं षट्कार्य की व्यवस्था , शुद्धोपयोग का फल | प्रवचनसारः गाथा -14, 15 | प्रवचनसारः गाथा -12, 13 | प्रवचनसारः गाथा -10, 11 | प्रवचनसारः गाथा -8, 9 | प्रवचनसारः गाथा -7 | प्रवचनसारः गाथा -6 | प्रवचनसारः गाथा -3, 4, 5 | प्रवचनसारः गाथा -1, 2
प्रवचनसार : ज्ञेयतत्त्वाधिकार
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 23 सप्तभंगी-जैन दर्शन का अनेकान्त दर्शन
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 21,22 ज्ञान,कर्म और कर्मफल का स्वरुप
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 19,20 किस कारण से पुद्गल का सम्बन्ध होता है ?
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 17,18 जीवके अनवस्थितपन
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 16 पराभव किस कारण से होता है?
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 15 नामकर्म जीव के स्वभाव का पराभव
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 14 जीवकी मनुष्यादि पर्यायो की क्रियाफलरूप
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 13 द्रव्य की सत्ता शाश्वत है
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 11, 12 द्रव्य का उत्पाद व व्यय क्या है?|
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा – 9, 10 उत्पाद, व्यय व ध्रौव्य
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -8 , उत्पाद, व्यय एवं ध्रौव्य
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -7 , स्वभाव में अवस्थित द्रव्य का सद्भाव
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -6 द्रव्य से द्रव्यान्तर होना
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -5 , छह द्रव्यो के लक्षण एवम सत् का अर्थ
- प्रवचनसारः ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -4, द्रव्य का स्वभाव
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -3
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -2 स्वसमय तथा परसमय का स्वरूप
- प्रवचनसार: ज्ञेयतत्त्वाधिकार-गाथा -1 उत्पादादिका क्षणभेद हटाकर द्रव्यत्व का द्योतन
Front Desk Jainism Forum (FDJF)
- जीव के धर्म तथा गुण – 4
- जीवके धर्म तथा गुण – 3
- जीवके धर्म तथा गुण – 2
- जीवके धर्म तथा गुण
- बारह भावनाएं (बारह अनुप्रेक्षा) BARAH BHAVNA
- गुणस्थान
- श्रेणी किसे कहते हैं और श्रेणी के कितने भेद हैं ?
- चौदह मार्गणा
- ६३ शलाका पुरुषों के नाम
- daslakshan dharma – दशलक्षण धर्म
- उत्तम आर्जव धर्म
- दसलक्षण मण्डल विधान
- सोलह – कारण भावना (Solah -karan bhawana)
- कर्म वृक्ष – karmic tree
- भक्तामर महिमा bhaktamber Mahima
- षट्खण्डागम के छह खण्ड
- समेदशिखरतीर्थ की सभी टोंक के नाम तीर्थंकर के नाम साथ
- दर्शन—पाठ(हिंदी अनुवाद )
- गोम्मटसार कर्मकाण्ड गाथा -3
- Karma
- Spirituality
- चतुर्विध संघ
- Gunsthan (गुणस्थान)
- जैन दर्शन और अन्य मतो का तुलनात्मक अध्ययन
- जैन दर्शन एक तुलनात्मक अध्ययन
- प्रमुख जैन ग्रंथ और उनके रचयिता
- गोम्मटसार कर्मकाण्ड गाथा -2
- गोम्मटसार कर्मकाण्ड गाथा -1
- जिन पूजा
- जैन दर्शन अनुसार 12 चक्रवर्ती सम्राट
- तीर्थंकरों के अदभुत गुण जो सामान्य मनुष्यों में नहीं पाए जाते-
- कुन्दकुन्दाचार्य
- वर्तमान २४ तीर्थंकर
- श्रावक की ग्यारह प्रतिमाएं
- जिनवाणी
- पुरुरवा से लेकर भगवान महावीर के ३४ भव
- श्रुत पंचमी क्यों मनाते हैं
- वर्तमान विदेह क्षेत्रस्थ २० तीर्थंकर
- वर्तमान चौबीस तीर्थंकरों की आयु
Shri Digambar Jain Mandir Dev Darshan
Parshvanath Digambar Jain Purana Mandir Palganj पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पुराना मंदिर पालगंज
CRPF Camp Bhagwan Parshvanath Jinalaya Madhuban Jharkhand CRPF कैम्प स्थित भगवान पार्श्वनाथ जिनालय, मधुबन (झारखंड) मधुबन,
Atishaya Kshetra Chandragiri Benar श्री दिगम्बर जैन चंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र चन्द्रगिरि बैनाड़ जयपुर राजस्थान
Vedi pratishtha mahotsav kheeriya jain mandir वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, खीरिया – दिनांक : 9–10 नवंबर 2025 9 नवंबर 2025 –
Shri Digamber Jain Parwar Mandir Itwari Nagpur श्री दिगंबर जैन परवार मंदिर, इतवारी नागपुर नागपुर
Shri Shantinath Digambar Jain Temple – Ramtek (Nagpur, Maharashtra) श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर – रामटेक (नागपुर, महाराष्ट्र)
Shree Mahaveer Digambar Jain Mandir Civil lines Jaipur श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर हरि मार्ग , सिविल लाइंस, जयपुर,
Jain Mandir Beri Sikar श्री 1008 आदिनाथ दि. जैन मन्दिर, बेरी भजनगढ़ (सीकर)
Shri Agarwal Digamber Jain Mandir, Connaught Place, New Delhi श्री अग्रवाल दिगम्बर जैन मंदिर, राजा बाजार, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
Bhagwan Mahaveer Digamber Jain Mandir, Jangpura, Bhogal, New Delhi श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, जंगपुरा, भोगल, नई दिल्ली
- Bhagawan Bahubali Swami ,Shrawanbelgola, Karnataka
- Shri 1008 Mahaveer Swami ,Panna (M.P.)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan, Gondalmahu, Distt. Shajapur, (M.P.)
- Shri 1008 Adinath Bhagawan , Jayasinghpura ,Ujjain (M.P.)
- Shri 1008 Adinath Bhgawan Amarpatan Distt.Satana (M.P.)
- Shri 1008 Adinath Bhagawan Jamner Distt. Shaajaapur (M.P.)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan ,Panihar Distt. Gwalior (M.P.)
- Shri 1008 Adinath Bhagawan, Moti Katra Agra(U.P.)
- Shri 1008 Adinath Bagawan , Bhuvaneshwar (Orissa)
- Shri 1008 Mahaveer Swami , Mahaveer Marg Satana(M.P.)
- Shri 1008 Mahaveer Swami Samanarmalai (karadeepatti)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan, Panna (M.P)
- Shri 1008 Vimalnath Bhagawan, Sidhauli,Sitapur (U.P
- Shri Digambar Jain Mandir ,Bajarang garh
- Shri Digambar Jain Temple , Perayur (Tamilnadu)
- Shri Digambar Jain Temple, Lakkundi, (Karnataka)
- Shri Digambar Jain Mandir Nahan (H.P.)
- Shri 1008 Prshvanath Bhagawan Jinkanchi Jain Math Mailsitamur (Tamilnadu)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan,Prataap pur Katak,(Orrisaa)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan, Hundi Hadgali , Gulbargaa ,(Karnataka)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan ,Kamathaan(Karnataka)
- Shri 1008 Parshvanath Bhagawan , Swarn Mandir,Gwalior (M.P.)
खण्डेलवाल जैन समाज का वृहद् इतिहास (The Comprehensive History of the Khandelwal Jain Samaj)
दिगंबर जैन समाज की 84 जातिया ( 84 castes (Jatis) of Digambar Jain)
ब्रह्म जिनदास | बख्तराम साह ( बुद्धि विलास ) | 1914 दिगम्बर जैन डाइरेक्टरी
दिगंबर जैन समाज की प्रमुख जातियों का परिचय ( Introduction to the Prominent Jatis of the Digambar Jain )
खण्डेलवाल | अग्रवाल | परवार | बघेरवाल | जैसवाल | पल्लीवाल | नरसिंहपुरा | ओसवाल | लमेचू | हुंबड |
खण्डेलवाल दिगम्बर जैन समाज 84 गोत्रों का इतिहास History of 84 gotras of Khandelwal Digambar Jain
- सीकर-लाडनू-नागौर, सांभर नरायणा की ओर
- चित्तौड़-अजमेर-घटियाली-मालपुरा-आमेर, सांगानेर की ओर
- मालवा क्षेत्र की ओर
- महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत की ओर
- दिल्ली-आगरा-उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रान्तो की ओर
- बिहार-बंगाल-आसाम-डीमापुर-मणिपुर की ओर
सम्मेद शिखरजी यात्रा
- Day 1
- सम्मेद शिखरजी यात्रा – Day 2 ( श्री सम्मेद शिखरजी विधान)
- सम्मेद शिखरजी यात्रा – Day 3 (Parvat Vandana)
- सम्मेद शिखरजी यात्रा – Day 4 (Parikrama & Talhati Darshan)
- सम्मेद शिखरजी यात्रा – Day 5
FAIR USE DECLARATION
This information is provided by the Front Desk Jainism Forum (FDJF) under Fair Use guidelines for educational and research purposes. To the best of our knowledge, it is in the public domain, and our goal is to make it more accessible.
If you are the intellectual property owner and have concerns, please contact us, and we will address the matter promptly. Users are advised to verify legal use in their jurisdiction before accessing this material. For more details, visit our website.