ॐ णमो भयवदो वढमाणस्स रिसहस्स जस्सं चक्कं जलतं गच्छइ आयासं पायालं लोयाणं भूयाणं जुएवा विवादेवा रणागणे वा थंभणेवा मोहणेवा सव्व जीव सत्ताणं अपराजितो भवदु में रक्ख रक्ख स्वाहा
हिन्दी अनुवाद —-
“ॐ! भय का निवारण करने वाले, वर्धमान रूपधारी आद्य ऋषभनाथ को नमस्कार है—
जिनका प्रज्वलित चक्र आलोकित होकर निरंतर विचरता है।
वे, जो आहार और पान में, लोकों और असंख्य भोगों में,
जुआ और विवादों में, रणभूमि के घोर संग्राम में,
विश्राम और मोहिनी भावनाओं में स्थित
समस्त जीव-सत्ताओं पर सदा अपराजित हैं—
वे प्रभु मेरी रक्षा करें, रक्षा करें—स्वाहा।”




