आत्ममंथन से आत्मपरिष्कार की ओर
भगवत् जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ तृतीय दिवस | जयपुर | 27 जनवरी 2026
चारित्र शुद्धि विधान के तृतीय दिवस पर जयपुर की पावन धरती एक बार फिर संयम, साधना और समर्पण की दिव्य तरंगों से
स्पंदित होती दिखाई दी। यह दिवस केवल अनुष्ठान का नहीं, बल्कि अंतर्मन में उतरकर अपने दोषों से साक्षात्कार करने का दिवस था।
वृहत् चारित्र शुद्धि विधान – गहन आत्मशुद्धि की प्रक्रिया
तृतीय दिवस का मुख्य केंद्र रहा वृहत् चारित्र शुद्धि विधान, जिसमें मन, वचन और काया से अनजाने में हुए
दोषों, विकारों और चारित्रभंग के कारणों का सूक्ष्मता से परिष्कार किया गया।
यह विधान सिर्फ पुण्य संचय का नहीं, बल्कि पाप-प्रक्षालन का महाअनुष्ठान है—
जहाँ साधक अपने भीतर जमी मलिनता को साक्षी भाव से छोड़ता है।
पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के एक-एक वचन श्रद्धालुओं के लिए दर्पण बनते गए— जहाँ हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकता हुआ दिखाई दिया।
प्रवचन – आज के समय में चारित्र की चुनौती
पूज्य आचार्य श्री ने तृतीय दिवस के प्रवचन में आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती— मन की अशुद्धि
पर गंभीर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा—
- आज सबसे अधिक पाप मन से हो रहे हैं
- असंयम का सबसे बड़ा कारण विचारों की अशुद्धि है
- मोबाइल, दृश्य और आकर्षण
चारित्र को भीतर से कमजोर कर रहे हैं
“चारित्र शुद्धि विधान देह को नहीं, मन को धोने का विधान है।”
इन वचनों ने श्रद्धालुओं को गहन आत्मचिंतन में डुबो दिया।
अभिषेक, शांतिधारा और भक्ति के रंग
प्रवचन के उपरांत श्रावकों ने भगवान जिनेंद्र की प्रतिमा को शिरोधार्य कर मंडल जी की प्रदक्षिणा की। भक्ति की बयार तब और तेज हुई जब:
श्रावकओं ने श्रीजी की प्रतिमा का शिरोद्धार कर मंडल जी की भव्य प्रदक्षिणा की।
अभिषेक: भक्तों ने पांडु शिला पर विराजमान प्रभु का प्रासुक जल से अभिषेक किया। कलशों से झरती शांत, शीतल जलधारा मानो अंतरात्मा की मलिनता को धो रही थी।
शांतिधारा: रिद्धि मंत्रों के साथ विश्व कल्याण की मंगल कामना करते हुए शांतिधारा संपन्न हुई।
आरती: “प्रभु जी मैं तो उतारूँ थारी आरती” के भजनों के बीच दीपकों की लौ ने भक्ति का अद्भुत दृश्य उपस्थित किया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को विनयांजलि
इस अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस पर उन्हें भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित की गई। आचार्य श्री ने उनकी वीतरागता को याद करते हुए पुस्तक “लोकोत्तर महापुरुष की महायात्रा” का उल्लेख किया।
तृतीय दिवस – अचौर्य और ब्रह्मचर्य व्रत अर्घ्य, विधान पूजन
श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर प्रभु को अर्घ्य अर्पित किए। विधान पूजन में प्रत्येक अर्घ्य का भावार्थ और आध्यात्मिक संकेत समझाया गया, जिससे आराधना केवल क्रिया नहीं, अनुभूति बन गई।
विधान के तीसरे दिन विशेष रूप से अचौर्य (चोरी न करना) और ब्रह्मचर्य व्रत की शुद्धता पर बल दिया गया। आचार्य श्री ने मोबाइल और सोशल मीडिया (Reels) के दौर में मन की विकृतियों पर प्रहार करते हुए कहा:
“यह अनुष्ठान पुण्य कमाने के लिए नहीं, बल्कि अनजाने में किए गए पापों को धोने के लिए है। आज सबसे ज्यादा पाप शरीर या वचन से नहीं, बल्कि मोबाइल के माध्यम से ‘मन’ से हो रहे हैं।”
तृतीय दिवस एक गहरी यात्रा बन गया— बाहरी आडंबर से भीतर की साधना तक।
चारित्र दिखाने की नहीं, जीने की वस्तु है। जो भीतर शुद्ध है, वही बाहर स्थिर है। जयपुर में चल रहा यह
महाअनुष्ठान आत्मशुद्धि की एक जीवंत पाठशाला बन चुका है।
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पत्रिका न्यूज 28 jan 2026 patrika.com
जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ ‘अहिंसा परिपालन जैन धर्म का केन्द्र बिन्दु है’
विधान में चढ़ाए 450 अर्घ्य, अहिंसा व्रत पूजा सहित हुई चार पूजा आचार्य विद्यासागर के समाधि दिवस पर हुई विनयांजलि

जयपुर. जैन धर्म ने आचार और विचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां दी है। अहिंसा का परिपालन इस धर्म का केन्द्र बिन्दु रहा है। संयम, तप, और त्यागमयी जीवन शैली का निर्माण जैन धर्म की अनुपम विशेषताएं हैं। ये उद्गार अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर ने मंगलवार को मानसरोवर वीटी रोड, शिप्रा पथ स्थित मेला। मैदान में आयोजित आठ दिवसीय विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान में व्यक्त किए। उन्होंने चारित्र शुद्धि व्रत उपवास तथा विधान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चारित्र शुद्धि व्रत में 1234 अंग है। अतः चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में 14 पूजाओं में 1234 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे।
इससे पूर्व उपाध्याय पीयूष सागर ने कहा कि संयम साधना की श्रेष्ठतम सौगात अर्थात मोक्ष मार्ग केवल मानव पर्याय को ही मिली है। उन्होंने बताया कि चारित्र शुद्धि दीर्घकालिक व्रत है।
आचार्य प्रवास समिति अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन एवं महामंत्री विनोद जैन ने बताया कि नवदेवता और देव शास्त्र गुरु की पूजा के बाद चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान की समुच्चय पूजा की गई। भक्ति भाव से अहिंसा व्रत पूजा करते हुए अष्ट द्रव्य से 126 अर्घ्य के साथ मण्डल पर धर्म ध्वजाएं चढ़ाई गई।
कोषाध्यक्ष कैलाश चन्द छाबड़ा ने बताया कि शाम को गुरु पूजा और प्रतिक्रमण किया गया। गुरु भक्ति एवं आनन्द यात्रा का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य ने जीवन में सफलता प्राप्त करने का मंत्र बताया। अशोक जैन, हरीश धाडूका, प्रदीप जैन, अमर चन्द दीवान मौजूद रहे।
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Day4 – 28 जनवरी 2026
भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव
द्वितीय दिवस – 26 जनवरी 2026 | तृतीय दिवस – 27 जनवरी 2026 | चतुर्थ दिवस – 28 जनवरी 2026 | पंचम दिवस – 29 जनवरी 2026 | षष्ठ दिवस– 30 जनवरी 2026 | सप्तम दिवस – 31 जनवरी 2026

