सोलह कारण विधान – कविवर श्री टेकचंद जी कृत
10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा
(अडिल्ल छन्द)
प्रातिहार्य वसु नान्त चतुष्टय जानिये, दस जन्मत दस केवल उपजत मानिये। चौदह देवा करें सकल छयालीस गुन, इन जुत अर्हत जजों थाप इहां शुद्ध मन।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम् ।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम् ।
(चौपाई)
पद्मकुण्ड को निर्मल नीर, कनझारिका धरिमन धीर। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा। चन्दन बावन नीर घसाय, रतनजडित झारी भर लाय। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय ।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा। अक्षत उज्ज्वल खण्ड न कोय, कनकथाल में धर शुध होय। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा। देवद्रुम के फूल सुलाय, माला कर सेवों जिन पाय। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय ।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा। नानारस नैवेद्य करेय, मोदक आदि सुभग कर लेय। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै नैवेयम् निर्वपामीति स्वाहा। दीपक रतनमई कर लिया, सुभगथाल भर सनमुख भया। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै दीपम् निर्वपामीति स्वाहा। धूप दशांग बनाय सु प्यार, बह्निमध्य जारो मजधार। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अहद्भक्ति भावना भाय ।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै धूपम् निर्वपामीति स्वाहा। श्रीफल लॉग बदाम अनार, खारक पुंगीफल ले सार। पूजों मन वच भक्ति लगाय, अर्हद्भक्ति भावना भाय।।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै फलम् निर्वपामीति स्वाहा।
English Meaning with Transliteration
Arhad-Bhakti Bhāvanā Pūjā
Opening Verse
Transliteration:
Prātihārya vasu nānta catuṣṭaya jāniye,
Das janmat das keval upajat māniye।
Caudah devā kareṁ sakal chayālīs gun,
In jut arhat jajoṁ thāp ihāṁ śuddha man॥
English Meaning:
The Lord Arhat is adorned with the four prātihāryas (divine miracles),
And possesses the ten pratibodhas (awakenings) and ten kevalajñānas (absolute knowledges).
Fourteen types of gods worship Him and all the forty-six attributes shine in Him.
Thus, with a pure heart, one should worship the Arhat with devotion.
Mantras:
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्।
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्तिभावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
Verse 1 – Offering of Water (जल अर्पण)
Chaupai Transliteration:
Padma-kuṇḍa ko nirmal nīra, kanajhārikā dhari mana dhīra।
Pūjoṁ mana vaca bhakti lagāya, arhad-bhakti bhāvanā bhāya॥
English Meaning:
From the lotus pond, I bring pure, holy water,
And place it in a golden vessel with steady devotion.
With mind and speech full of reverence, I worship,
Delighting in the Arhad-Bhakti Bhāvanā.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 2 – Offering of Sandal (चंदन अर्पण)
Transliteration:
Candan bāvana nīra ghasāya, ratna-jaḍita jhārī bhara lāya।
Pūjoṁ mana vaca bhakti lagāya, arhad-bhakti bhāvanā bhāya॥
English Meaning:
I prepare fragrant sandal paste mixed with pure water,
And fill it in a jewel-studded vessel.
With mind and speech absorbed in devotion, I offer,
Rejoicing in the Arhad-Bhakti Bhāvanā.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 3 – Offering of Rice/Grains (अक्षत अर्पण)
Transliteration:
Akṣata ujjval khaṇḍ na koye, kanak-thāl meṁ dhara śuddha hoye।
Pūjoṁ mana vaca bhakti lagāya, arhad-bhakti bhāvanā bhāya॥
English Meaning:
I offer shining, unbroken grains of rice,
Placing them with purity in a golden plate.
With mind and speech deeply devoted, I worship,
Experiencing the joy of Arhad-Bhakti Bhāvanā.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री अर्हद्भक्ति भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
11. आचार्यभक्ति भावना पूजा Acharya-Bhakti Bhavana Puja
1. दर्शनविशुद्धि भावना पूजा | प्रत्येकार्घ्य | जयमाला | 2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा | 3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा | 4. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग भावना पूजा | 5. संवेग भावना पूजा | 6. त्याग भावना पूजा | 7. तपो भावना पूजा | 8. साधुसमाधि भावना पूजा | 9. वैयावृत्य भावना पूजा | 10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा | 11. आचार्यभक्ति भावना पूजा | 12. बहुश्रुतभक्ति भावना पूजा | 13 प्रवचनभक्ति भावना पूजा | 14. षट् आवश्यक भावना पूजा | 15. मार्गप्रभावना भावना पूजा | 16 प्रवचनवात्सल्य भावना पूजा | समुच्चय जयमाला