आदिपुराण पर्व 12 – भगवान के स्वर्गावतरण का वर्णन पर्व 12 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 153
श्लोक 154 से 161 नाभिराज का स्वप्न फल
नाभिराज ने कहा: हाथी—उत्तम पुत्र, बैल—ज्येष्ठ, सिंह—बलवान, मालाएँ—तीर्थ स्थापक, लक्ष्मी—अभिषिक्त, चंद्र—आनंददायक, सूर्य—प्रभायुक्त, कलश—निधियुक्त, मछलियाँ—सुखी, सरोवर—लक्षणयुक्त, समुद्र—केवली, सिंहासन—जगद्गुरु, विमान—स्वर्गावतीर्ण, नाग भवन—अवधिज्ञानी, रत्न—गुणवान, अग्नि—कर्मदाहक, बैल—वृषभदेव गर्भ में।
English translation of Ādi purāṇa parv 12 – Shlok 154 to 161
श्लोक ( Shlok ) 154
अथासाववधिज्ञानविबुद्धस्वप्नसत्फलः । प्रोवाच तत्फलं देव्यै लसद्दशनदीधितिः ॥ १५४॥
तदनंतर, अवधिज्ञान के द्वारा जिन्होंने स्वप्नों का उत्तम फल जान लिया है और जिनकी दाँतों की किरणें अतिशय शोभायमान हो रही हैं ऐसे महाराज नाभिराज मरुदेवी के लिए स्वप्नों का फल कहने लगे ।।154।।
Thereafter, through the knowledge of auspicious signs (Avadhijnana), those who had understood the excellent results of dreams and whose teeth radiated with immense brilliance began to interpret the meaning of the dreams for Queen Marudevi on behalf of King Nabhiraja. ||154||
श्लोक ( Shlok ) 155
शृणु देवि महान् पुत्रो भविता ते गजेक्षणात् । समस्तभुवनज्येष्ठो महावृषभदर्शनात् ॥ १५५॥
हे देवि, सुन, हाथी के देखने से तेरे उत्तम पुत्र होगा, उत्तम बैल देखने से वह समस्त लोक में ज्येष्ठ होगा ।।155।।
O Devi, listen! Seeing an elephant means you will have an excellent son, and seeing a noble bull signifies that he will be the foremost among all beings in the world. ||155||
श्लोक ( Shlok ) 156
सिंहेनानन्त वीर्योऽसौ दाम्ना सद्धर्मंतीर्थकृत् । लक्ष्यामिषेकमाप्तासौ मेरोर्मूंर्ध्नि सुरोत्तमैः ।।१५६।।
सिंह के देखने से वह अनंत बल से युक्त होगा, मालाओं के देखने से समीचीन धर्म के तीर्थ (आम्नाय) का चलाने वाला होगा, लक्ष्मी के देखने से वह सुमेरु पर्वत के मस्तक पर देवों के द्वारा अभिषेक को प्राप्त होगा ।।156।।
Seeing a lion means he will possess infinite strength. Seeing garlands signifies that he will establish the sacred path of true Dharma. Seeing Goddess Lakshmi indicates that he will be anointed by the gods on the summit of Mount Sumeru. ||156||
श्लोक ( Shlok ) 157
पूर्णेन्दुना जनाह्लादी भास्वता भास्वरद्यितिः । कुम्भाभ्यां निधिभागी स्यात् सुखी मत्स्य युगेक्षणात् ।। १५७
पूर्ण चंद्रमा के देखने से समस्त लोगों को आनंद देने वाला होगा, सूर्य के देखने से दैदीप्यमान प्रभा का धारक होगा, दो कलश देखने से अनेक निधियों को प्राप्त होगा, मछलियों का युगल देखने से सुखी होगा ।।157।।
Seeing the full moon means he will bring joy to all people. Seeing the sun signifies that he will possess radiant brilliance. Seeing two pitchers indicates that he will attain immense treasures, and seeing a pair of fish means he will be blessed with happiness. ||157||
श्लोक ( Shlok ) 158
सरसा लक्षणोद्भासी सोऽब्धिना केवली भवेत् । सिंहासनेन साम्राज्यमवाप्स्यति जगद्गुरुः ॥१५८।।
सरोवर के देखने से अनेक लक्षणों से शोभित होगा, समुद्र के देखने से केवली होगा, सिंहासन के देखने से जगत् का गुरु होकर साम्राज्य को प्राप्त करेगा ।।158।।
Seeing a lake means he will be adorned with many auspicious signs. Seeing the ocean signifies that he will attain omniscience (Kevalihood). Seeing a throne indicates that he will become the spiritual teacher of the world and attain supreme sovereignty. ||158||
श्लोक ( Shlok ) 159
स्वर्विमानावलोकेन स्वर्गादवतरिष्यति । फणीन्द्रभवनालोकात् सोऽवधिज्ञानलोचनः ।। १५९॥
देवों का विमान देखने से वह स्वर्ग से अवतीर्ण होगा, नागेंद्र का भवन देखने से अवधिज्ञान रूपी लोचनों से सहित होगा ।।159।।
Seeing the celestial chariot means he will descend from heaven, and seeing the palace of the serpent king signifies that he will possess Avadhijnana (clairvoyant knowledge), like divine eyes. ||159||
श्लोक ( Shlok ) 160
गुणानामाकरः प्रोद्यद्रत्नराशिनिशामनात् । कर्मेन्धन धगप्येष निर्धूमज्वलनेक्षणात् ।।१६०।।
चमकते हुए रत्नों की राशि देखने से गुणों की खान होगा, और निर्धूम अग्नि के देखने से कर्मरूपी इंधन को जलाने वाला होगा ।।160।।
Seeing a collection of shining jewels means he will be a treasure house of virtues, and seeing smokeless fire signifies that he will burn away the fuel of karma. ||160||
श्लोक ( Shlok ) 161
वृषभाकारमादाय भवत्यास्यप्रवेशनात् । त्वदगर्भे वृषभो देवः “स्वमाधास्यति निर्मले ॥१६१
तथा तुम्हारे मुख में जो वृषभ ने प्रवेश किया है उसका फल यह है कि तुम्हारे निर्मल गर्भ में भगवान् वृषभदेव अपना शरीर धारण करेंगे ।।161।।
And the meaning of the bull entering your mouth is that Lord Rishabhadeva will take birth in your pure womb. ||161||
श्लोक 162 से 171
भगवज्जिनसेनाचार्य विरचित आदिपुराण Ādi purāṇa by Acharya Jinasena
पर्व 1 – श्लोक 1 | पर्व 2 – श्लोक 1 से 10 | पीठिकावर्णन पर्व 3 – श्लोक 1 से 10 | श्रीमहाबलाभ्युदयवर्णन पर्व 4 – श्लोक 1 से 11 | ललितांग स्वर्गभोग वर्णन पर्व 5 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 292 | श्लोक 293 से 296 ललितांगदेव का स्वर्ग से च्युत होने आदि का वर्णन पर्व 6 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 208 श्रीमती और वज्रजंघ के समागम का वर्णन पर्व 7 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 318 आदिपुराण पर्व 8 – श्रीमती और वज्रजंघ के पात्रदान का वर्णन पर्व 8 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 252 | श्लोक 253 से 257 आदिपुराण पर्व 9– श्रीमती और वज्रजंघ आर्य को सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति का वर्णन पर्व 9 श्लोक 1 से 11 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 195
आदिपुराण पर्व 10 –श्रीमान् अच्युतेंद्र के ऐश्वर्य का वर्णन पर्व 10 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 208
आदिपुराण पर्व 11 – श्री भगवान वज्रनाभि के सर्वार्थसिद्धिगमन का वर्णन पर्व 11 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 102 | श्लोक 103 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 142 | श्लोक 143 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221
आदिपुराण पर्व 12 – भगवान के स्वर्गावतरण का वर्णन पर्व 12 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 153