चन्दना आर्यिका और जीवन्धर स्वामीका चरित वर्णन पर्व 75 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 25 | श्लोक 26 से 41
मूल संस्कृत श्लोक . हिंदी अनुवाद . English translation of Uttar Puran parv 75- shlok 42 to 51
श्लोक ( Shlok ) 42 – 44
चेष्टामालोकिनीविद्यातो ज्ञात्वा स्वपतेरनु । गच्छन्त्यर्धपथे दृष्ट्वा विसृजेमां स्वजीवितम् ॥ ४२ ॥यदि वाब्छेरिति क्रोधात्तं निर्भर्त्सयति स्म सा । स भूतरमणेऽरण्ये तां स्वदारातिभीलुकः ॥ ४३ ॥ ऐरावतीसरिद्दक्षिणान्ते साधितविद्यया । पर्णलष्ठया तदैवान्तःकृतशोको विसृष्टवान् ॥ ४४ ॥
तदनन्तर वह मनोवेगा रानी आलोकिनी नामकी विद्यासे अपने पतिकी सब चेष्टा जानकर उसके पीछे दौड़ी और आधे मार्गमें चन्दना सहित लौटते हुए पतिको देखकर बोली कि यदि अपना जीवन चाहते हो तो इसे छोड़ दो। इस प्रकार क्रोधसे उसने उसे बहुत ही डाँटा । मनोवेग अपनी स्त्रीसे बहुतही डर गया। इसलिए उसने हृदय में बहुत ही शोककर सिद्ध की हुई पर्णलध्वी नामकी विद्यासे उस चन्दनाको भूतरमण नामक वनमें ऐरावती नदीके दाहिने किनारे पर छोड़ दिया ॥ ४२-४४ ॥
“Thereafter, Queen Manovega learned all the movements of her husband through the magical art (Vidya) named Alokini and pursued him. Catching up to her husband halfway as he was returning with Chandana, she said, ‘If you value your life, let her go!’ She scolded him severely in this manner out of anger. Manovega became terrified of his wife. Therefore, filled with deep sorrow in his heart, he abandoned Chandana on the right bank of the Airavati river in the Bhutaramana forest using the magical art named Parnaladhvi, which he had mastered. // 42-44 //”
श्लोक ( Shlok ) 45 – 48
सापि पञ्चनमस्कारपरिवर्तनतत्परा । निनाय शर्वरीं कृच्छ्राद्भानुमत्युदिते स्वयम् ॥ ४५ ॥तत्र सन्निहितो दैवात्कालकाख्यो वनेचरः । तस्मै निजपरार्थोरुस्फुरिताभरणान्यदात् ॥ ४६ ॥धर्मश्च कथयामास तेन तुष्टो वनेचरः । भीमकूटाचलोपान्तनिवासी सिंहसम्ज्ञकः ॥ ४७ ॥ भयङ्कराख्यपल्लीशस्तस्य तां स समर्पयत् । सोऽपि पापो विलोक्यैनां कामव्यामोहिताशयः ॥ ४८ ॥
पञ्च-नमस्कार मन्त्रका जप करनेमें तत्पर रहने वाली चन्दनाने वह रात्रि बड़े कष्टसे बिताई। प्रातःकाल जब सूर्यका उदय हुआ तब भाग्यवश एक कालक नामका भील वहाँ स्वयं आ पहुँचा। चंन्दनाने उसे अपने बहुमूल्य देदीप्यमान आभूषण दिये और धर्मका उपदेश भी दिया जिससे वह भील बहुत ही सन्तुष्ट हुआ। वहीं कहीं भीमकूट नामक पर्वतके पास रहनेवाला एक सिंह नामका भीलोंका राजा था, जो कि भयंकर नामक पल्लीका स्वामी था। उस कालक नामक भीलने वह चन्दना उसी सिंह राजाको सौंप दी। सिंह पापी था अतः चन्दनाको देखकर उसका हृदय कामसे मोहित हो गया ।॥ ४५-४८ ॥
“Chandana, who remained deeply absorbed in chanting the Pancha-Namaskara Mantra, passed that night with great difficulty. In the morning, when the sun rose, by a stroke of fortune, a Bhil (tribal man) named Kalaka arrived there on his own. Chandana gave him her highly valuable, radiant ornaments and also preached the religious doctrine to him, which left the Bhil deeply satisfied. Somewhere nearby, around a mountain named Bhimakuta, lived a Bhil king named Sinha, who was the lord of a terrifying settlement (palli). That Bhil named Kalaka handed Chandana over to this King Sinha. Sinha was sinful; therefore, upon seeing Chandana, his heart became completely infatuated with lust. // 45-48 //”
श्लोक ( Shlok ) 49 – 50
निग्रहेण ग्रहः क्रूरो वात्मसात्कर्तुमुद्यतः । तद्वीक्ष्य पुत्र मैवं त्वं कृथाः प्रत्यक्षदेवता ॥ ४९ ॥ यदि कुप्येदियं तापशापदुःखप्रदायिनी । इति मात्रुक्तिभीत्या तां दुर्जनोऽपि व्यसर्जयत् ॥ ५०॥
वह क्रूर ग्रहके समान निग्रह कर उसे अपने आधीन करनेके लिए उद्यत हुआ। यह देख उसकी माताने उसे समझाया कि हे पुत्र ! तू ऐसा मत कर, यह प्रत्यक्ष देवता है, यदि कुपित हो गई तो कितने ही संताप, शाप और दुःख देने वाली होगी। इस प्रकार माताके कहनेसे डरकर उसने स्वयं दुष्ट होनेपर भी वह चन्दना छोड़ दी ॥ ४९-५० ॥
“Like a cruel, malevolent planet, he prepared to restrain and subjugate her. Seeing this, his mother reasoned with him, saying, ‘O son! Do not do this. She is a living deity. If she becomes angry, she will inflict countless miseries, curses, and sorrows.’ Fearing his mother’s words in this manner, he let Chandana go, despite being wicked himself. // 49-50 //”
श्लोक ( Shlok ) 51
चन्दना तस्य मात्रा सम्यग्विधानतः । पोष्यमाणा विनिश्चिन्ता कञ्चित्कालमजीगमत् ॥ ५१ ॥
तदनन्तर चन्दनाने उस भीलकी माताके साथ निश्चिन्त होकर कुछ काल वहीं पर व्यतीत किया। वहाँ भीलकी माता उसका अच्छी तरह भरण-पोषण करती थी ।। ५१ ॥
“Thereafter, Chandana spent some time there completely free of anxiety, staying with the mother of that Bhil. The Bhil’s mother took excellent care of her and provided for her well-being during her stay. // 51 //”
श्लोक 52 से 63
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