नेमि चरित्र प्रकरण में श्रीकृष्ण, बलदेव, श्रीकृष्णकी पट्टरानियाँ आदि भवान्तरों का वर्णन पर्व 71 – श्लोक 52 से 64 | श्लोक 65 से 81 | श्लोक 82 से 93 | श्लोक 94 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121
मूल संस्कृत श्लोक . हिंदी अनुवाद . English translation of Uttar Puran parv 71- shlok 122 to 130
श्लोक ( Shlok ) 122
प्रविष्टवन्तं तं देवविद्याधरधराधिपाः । त्रिखण्डाधिपतिश्चक्रीत्यभ्यषिञ्चन्नयाचितम् ॥ १२२ ॥
प्रवेश करते ही देव और विद्याधर राजाओंने उन्हें तीन खण्डका स्वामी चक्रवर्ती मानकर उनका बिना कुछ कहे सुने ही अपने आप राज्याभिषेक किया ॥ १२२ ॥
“The moment He entered, the deities and the Vidyadhara kings—unanimously recognizing Him as the Chakravarti (universal sovereign) and lord of the three realms—spontaneously performed His royal coronation without Him having to say a single word.”122
श्लोक ( Shlok ) 123
स सहस्रसमायुष्को दशचापसमुच्छ्रितिः । लसनीलाब्जवर्णाभो लक्ष्म्यालिङ्गितविग्रहः ॥ १२३ ॥
श्रीकृष्णकी एक हजार वर्षकी आयु थी, दश धनुषकी ऊँचाई थी, अतिशय सुशोभित नील-कमलके समान उनका वर्ण था, और लक्ष्मीसे आलिङ्गित उनका शरीर था ।॥ १२३ ॥
“Lord Krishna had a lifespan of one thousand years, a height of ten bows (dhanush), a complexion as exceedingly beautiful as a blue lotus, and a body embraced by Goddess Lakshmi. || 123 ||”
श्लोक ( Shlok ) 124
चक्रं शक्तिर्गदा शङ्खो धनुर्दण्डः सनन्दकः । बभूवुः सप्तरत्नानि रक्षाण्यस्याक्षपालकैः ॥ १२४ ॥
चक्र, शक्ति, गदा, शङ्ख, धनुष, दण्ड, और नन्दक नामका खङ्ग ये उनके सात रन थे। इन सभी रत्नोंकी देव लोग रक्षा करते थे ।। १२४ ॥
“The discus (Chakra), the spear (Shakti), the mace (Gada), the conch (Shankha), the bow (Dhanush), the staff (Danda), and the sword named Nandaka—these were His seven jewels (ratnas). All these jewels were guarded by the gods. || 124 ||”
श्लोक ( Shlok ) 125
रत्नमाला गदा सीरो मुसलञ्च हलेशिनः । महारत्नानि चत्वारि स्फुरत्विष्यभवन् विभोः ॥ १२५ ॥
रत्नमाला, गदा, हल और मूसल ये देदीप्यमान चार महारत्न बलदेव प्रभुके थे ।। १२५ ।।
“The jeweled garland (Ratnamala), the mace (Gada), the plow (Hala), and the pestle (Musala)—these four radiant great jewels (maharatnas) belonged to Lord Baladeva. || 125 ||”
श्लोक ( Shlok ) 126 – 128
रुक्मिणी सत्यभामा च सती जाम्बवतीति च । सुसीमा लक्ष्मणा गान्धारी गौरी सप्तमी प्रिया ॥१२६॥पद्मावती च देव्योऽमूरष्टौ पट्टप्रसाधनाः । सर्वाः देव्यः सहस्त्राणि चाणूरान्तस्य षोडश ॥ १२७ ॥ बलस्याष्ट सहस्त्राणि देव्योऽभीष्टसुखप्रदाः । त्ताभिस्ताबामरं सौख्यमाप्तौ वा प्रीतिमीयतुः ॥ १२८ ॥
रुक्मिणी, सत्यभामा, सती जाम्बवती, सुसीमा, लक्ष्मणा, गान्धारी, सप्तमी गौरी और प्रिया पद्मावती ये आठ देवियां श्रीकृष्णकी पट्टरानियाँ थीं। इनकी सब मिलाकर सोलह हजार रानियाँ थीं तथा बलदेवके सब मिलाकर अभीष्ट सुख देनेवाली आठ हजार रानियां थीं । ये दोनों भाई इन रानियोंके साथ देवोंके समान सुख भोगते हुए परम प्रीतिको प्राप्त हो रहे थे ।।१२६-१२८।।
“Rukmini, Satyabhama, the virtuous Jambavati, Susima, Lakshmana, Gandhari, the seventh Gauri, and the beloved Padmavati—these eight goddesses were the chief queens (patranis) of Lord Krishna. Counting all of them together, He had sixteen thousand queens. Similarly, Lord Baladeva had a total of eight thousand queens who bestowed desired happiness. These two brothers, enjoying happiness akin to the gods along with these queens, were experiencing supreme love and bliss. || 126-128 ||”
श्लोक ( Shlok ) 129 – 130
स्वपूर्वकृतपुण्यस्य परिपाकेन पुष्कलान् । भोगान्प्राप्नुवतस्तस्य काले गच्छति शाङ्गिणः ॥ १२९ ॥ अन्येद्युर्वारिदान्तेऽन्तःपुरेणामा सरोवरे । मनोहराभिधानेऽभूज्जलकेली मनोहरा ॥ १३० ॥
इस प्रकार पूर्व जन्ममें किये हुए अपने पुण्य कर्मके उदयसे पुष्कल भोगोंको भोगते हुए श्रीकृष्णका समय सुखसे व्यतीत हो रहा था। किसी एक समय शरद् ऋतुमें सब अन्तःपुरके साथ मनोहर नामके सरोवरमें सब लोग मनोहर जलकेली कर रहे थे। वहीं पर जल उछालते समय भगवान् नेमिनाथ और सत्यभामाके बीच चतुराईसे भरा हुआ मनोहर वार्तालाप हुआ ।। १२९ -१३०॥
“In this manner, due to the rise of their meritorious deeds (punya karma) performed in previous births, Lord Krishna’s time was passing happily while enjoying abundant pleasures. Once, during the autumn season, everyone along with the entire inner apartment (antahpura/royal household) was engaging in delightful water-sports in a beautiful lake named Manohara. Right there, while splashing water, a witty and charming conversation took place between Lord Neminatha and Satyabhama. || 129-130 ||”
श्लोक 131 से 141
उत्तरपुराण Uttarapurana home page
अजितनाथ तथा सगर चक्रवर्ती पर्व 48 – श्लोक 1 से 143 | संभवनाथ पर्व 49 – श्लोक 1 से 59 | श्री अभिनन्दनस्वामी पर्व 50 – श्लोक 1 से 70 | सुमतिनाथ पर्व 51 – श्लोक 1 से 87 | पद्मप्रभ पर्व 52 – श्लोक 1 से 70 सुपार्श्वनाथ स्वामी पर्व 53 – श्लोक 1 से 56 | चन्द्रप्रभ पर्व 54 – श्लोक 1 से 276 | पुष्पदन्त पर्व 55 – श्लोक 1 से 62 | शीतल पर्व 56 – श्लोक 1 से 96 | श्रेयांसनाथ त्रिष्टष्ठनारायण, विजय बलभद्र और अश्वमीव प्रतिनारायण पर्व 57 – श्लोक 1 से 100 | श्री वासुपूज्य , द्विपृष्ठनारायण, अचल बलभद्र और तारक प्रति-नारायण पर्व 58 – श्लोक 1 से 124 | विमलनाथ , धर्म, स्वयंभू, मधु, संजयन्त, मेरु और मंदर गणधर पर्व 59 – श्लोक 1 से 319 | अनन्तनाथ , सुप्रभ बलभद्र, पुरुषोत्तम नारायण और मधुसूदन प्रति-नारायण पर्व 60 – श्लोक 1 से 85 | धर्मनाथ , सुदर्शन बलभद्र, पुरुषसिंह नारायण, मधुक्रीड़ प्रतिनारायण, मघवा और सनत्कुमार चक्रवर्ती पर्व 61 – श्लोक 1 से 130 | अपराजित बलभद्र और अनन्तवीर्य नारायण पर्व 62 – श्लोक 1 से 513 | शान्तिनाथ पर्व 63 – श्लोक 1 से 510 | कुन्थुनाथ पर्व 64 – श्लोक 1 से 55 | अरनाथ, सुभौम चक्रवर्ती, नन्दिषेण बलभद्र, पुण्डरीक नारायण और निशुम्भ प्रतिनारायण पर्व 65 – श्लोक 1 से 192 | मल्लिनाथ , पद्मचक्रवर्ती, नन्दिमित्र बलदेव, दत्त नारायण और बलीन्द्र प्रति-नारायण पर्व 66 – श्लोक 1 से 125 | मुनिसुव्रत, हरिषेण चक्रवर्ती, राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण और रावण पर्व 67 – श्लोक 1 से 473 | राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण, सीता , रावण और अणुमान् के पुराण का वर्णन पर्व 68 – श्लोक 1 से 732 | नमिनाथ तीर्थंकर तथा जयसेन चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 69 – श्लोक 1 से 92 | नेमिनाथ स्वामी के चरित में श्रीकृष्णकी विजय का वर्णन पर्व 70 – श्लोक 1 से 497
नेमि चरित्र प्रकरण में श्रीकृष्ण, बलदेव, श्रीकृष्णकी पट्टरानियाँ आदि भवान्तरों का वर्णन पर्व 71 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 51 | श्लोक 52 से 64 | श्लोक 65 से 81 | श्लोक 82 से 93 | श्लोक 94 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121
Download PDF
आदिपुराण उत्तरपुराण हिन्दी-भाषानुवाद
पर्व 1 | पर्व 2 | पर्व 3 | पर्व 4 | पर्व 5 | पर्व 6 | पर्व 7 | पर्व 8 | पर्व 9 | पर्व 10 | पर्व 11 | पर्व 12 | पर्व 13 | पर्व 14 | पर्व 15 | पर्व 16 | पर्व 17 | पर्व 18 | पर्व 19 | पर्व 20 | पर्व 21 | पर्व 22 | पर्व 23 | पर्व 24 | पर्व 25 | पर्व 26 | पर्व 27 | पर्व 28 | पर्व 29 | पर्व 30 | पर्व 31 | पर्व 32 |पर्व 33 | पर्व 34 | पर्व 35 | पर्व 36 | पर्व 37 |पर्व 38 | पर्व 39 | पर्व 40 | पर्व 41 | पर्व 42 |पर्व 43 | पर्व 44 | पर्व 45 | पर्व 46 | पर्व 47 | उत्तरपुराण पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 | पर्व 54 |पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58 | पर्व 59 | पर्व 60 | पर्व 61 | पर्व 62 | पर्व 63 | पर्व 64 | पर्व 65 |
आदिपुराण उत्तरपुराण सारांश
पर्व 1पर्व 2 | पर्व 3 | पर्व 4 | पर्व 5 | पर्व 6 | पर्व 7 | पर्व 8 | पर्व 9 | पर्व 10 |पर्व 11 |पर्व 12 | पर्व 13 | पर्व 14 | पर्व 15 | पर्व 16 | पर्व 17 | पर्व 18 | पर्व 19 | पर्व 20 | पर्व 21 | पर्व 22 | पर्व 23 | पर्व 24 | पर्व 25 | पर्व 26 | पर्व 27 | पर्व 28 | पर्व 29 | पर्व 30 | पर्व 31 | पर्व 32 | पर्व 33 |पर्व 34 | पर्व 35 | पर्व 36 | पर्व 37 | पर्व 38 | पर्व 39 | पर्व 40 | पर्व 41 | पर्व 42 | पर्व 43 | पर्व 44 | पर्व 45 | पर्व 46 | पर्व 47 उत्तरपुराण पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 |पर्व 54 | पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58 | पर्व 59 | पर्व 60 | पर्व 61 | पर्व 62 | पर्व 63 | पर्व 64 | पर्व 65 |