गुणभद्राचार्य विरचित उत्तरपुराण मूल संस्कृत श्लोक . हिंदी अनुवाद . English translation
Uttarapurana Of Acharya Gunabhadra
उत्तरपुराण 9वीं-10वीं शताब्दी में आचार्य गुणभद्र द्वारा रचित एक प्रमुख दिगंबर जैन ग्रंथ है, जो महापुराण का दूसरा भाग है। यह भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित पं० पन्नालाल जैन द्वारा संपादित हिंदी/संस्कृत इसमें आदिनाथ के अलावा शेष 23 तीर्थंकरों, चक्रवर्तियों और महापुरुषों का जीवन वर्णित है।
मुख्य विवरण:
रचनाकार: आचार्य गुणभद्र (आचार्य जिनसेन के शिष्य) (ई. 898 )
विषय: 23 तीर्थंकरों (अजितनाथ से महावीर तक), 12 चक्रवर्तियों और अन्य शलाका पुरुषों का विवरण।
संरचना: इसमें 29 पर्व (अध्याय) और लगभग 8000 श्लोक हैं।
वास्तव में आचार्य गुणभद्र भी स्वयं इसे पूरा नहीं कर पाये थे। अतः इस ग्रंथ के अंतिम कुछ पद्य उनके भी शिष्य लोकचंद्र ने ई. 898 में पूरे किये थे।
महापुराण (त्रिषष्ठिलक्षण महापुराण) Mahapurana
पर्व 48 | पर्व 49 | पर्व 50 | पर्व 51 | पर्व 52 | पर्व 53 | पर्व 54 | पर्व 55 | पर्व 56 | पर्व 57 | पर्व 58 | पर्व 59 | पर्व 60 | पर्व 61 | पर्व 62 | पर्व 63 | पर्व 64 | पर्व 65 | पर्व 66 | पर्व 67
मूल संस्कृत श्लोक . हिंदी अनुवाद . English translation
उत्तरपुराण पर्व 48
अजितनाथ तीर्थंकर तथा सगर चक्रवर्ती का वर्णन पर्व 48 – श्लोक 1 से 8 | श्लोक 9 से 20 | श्लोक 21 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 73 | श्लोक 74 से 84 | श्लोक 85 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 143
उत्तरपुराण पर्व 49
संभवनाथ तीर्थंकर का पुराण वर्णन पर्व 49 – श्लोक 1 से 12 | श्लोक 13 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 54 | श्लोक 55 से 59
उत्तरपुराण पर्व 50
श्री अभिनन्दनस्वामी का पुराण वर्णन पर्व 50 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 53 | श्लोक 54 से 63 | श्लोक 64 से 70
उत्तरपुराण पर्व 51
सुमतिनाथ तीर्थंकर का पुराण वर्णन पर्व 51 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 87
उत्तरपुराण पर्व 52
पद्मप्रभ भगवान् के पुराण का वर्णन पर्व 52 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 43 | श्लोक 44 से 52 | श्लोक 53 से 64 | श्लोक 65 से 70
उत्तरपुराण पर्व 53
सुपार्श्वनाथ स्वामीका पुराण का वर्णन पर्व 53 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 34 | श्लोक 35 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 56
उत्तरपुराण पर्व 54
चन्द्रप्रभ पुराण का वर्णन पर्व 54 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 |श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 |श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 162 | श्लोक 163 से 173 | श्लोक 174 से 181 | श्लोक 182 से 193 | श्लोक 194 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 231 | श्लोक 232 से 241 | श्लोक 242 से 251 | श्लोक 252 से 261 | श्लोक 262 से 272 | श्लोक 273 से 276
उत्तरपुराण पर्व 55
पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) पुराण का वर्णन पर्व 55 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 62
उत्तरपुराण पर्व 56
शीतल पुराण का वर्णन पर्व 56 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 55 | श्लोक 56 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 96
उत्तरपुराण पर्व 57
श्रेयांसनाथ तीर्थकर त्रिष्टष्ठनारायण, विजय बलभद्र और अश्वमीव प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 57 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 62 | श्लोक 63 से 72 | श्लोक 73 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 100
उत्तरपुराण पर्व 58
श्री वासुपूज्य जिनेन्द्र, द्विपृष्ठनारायण, अचल बलभद्र और तारक प्रति-नारायण का वर्णन पर्व 58 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 32 | श्लोक 33 से 41 | श्लोक 42 से 53 | श्लोक 54 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 124
उत्तरपुराण पर्व 59
विमलनाथ तीर्थंकर, धर्म, स्वयंभू, मधु, संजयन्त, मेरु और मंदर गणधर का वर्णन पर्व 59 – श्लोक 1 से 13 | श्लोक 14 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 54 | श्लोक 55 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 91 | श्लोक 92 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 125 | श्लोक 126 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 |श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 232 | श्लोक 233 से 242 | श्लोक 243 से 252 | श्लोक 253 से 262 | श्लोक 263 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 291 | श्लोक 292 से 301 | श्लोक 302 से 312 | श्लोक 313 से 319
उत्तरपुराण पर्व 60
अनन्तनाथ तीर्थंकर, सुप्रभ बलभद्र, पुरुषोत्तम नारायण और मधुसूदन प्रति-नारायणके पुराणका वर्णन पर्व 60 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 42 | श्लोक 43 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 85
उत्तरपुराण पर्व 61
धर्मनाथ तीर्थकर, सुदर्शन बलभद्र, पुरुषसिंह नारायण, मधुक्रीड़ प्रतिनारायण, मघवा और सनत्कुमार चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 61 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 23 | श्लोक 24 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 90 | श्लोक 91 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 130
उत्तरपुराण पर्व 62
अपराजित बलभद्र और अनन्तवीर्य नारायण के अभ्युदय का वर्णन पर्व 62 – श्लोक 1 से 10 | श्लोक 11 से 21 |श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 52 | श्लोक 53 से 61 | श्लोक 62 से 72 | श्लोक 73 से 82 | श्लोक 83 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 122 | श्लोक 123 से 131 | श्लोक 132 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 |श्लोक 172 से 181 | श्लोक 182 से 191 | श्लोक 192 से 201 | श्लोक 202 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 240 | श्लोक 241 से 252 | श्लोक 253 से 261 | श्लोक 262 से 271 | श्लोक 272 से 283 | श्लोक 284 से 292 | श्लोक 293 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 |श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 363 | श्लोक 364 से 371 | श्लोक 372 से 382 | श्लोक 383 से 390 | श्लोक 391 से 401 | श्लोक 402 से 411 | श्लोक 412 से 421 | श्लोक 422 से 433 | श्लोक 434 से 442 | श्लोक 443 से 451 | श्लोक 452 से 462 | श्लोक 463 से 472 | श्लोक 473 से 481 | श्लोक 482 से 491 | श्लोक 492 से 501 | श्लोक 502 से 513
उत्तरपुराण पर्व 63
शान्तिनाथ तीर्थंकर तथा चक्रवर्ती का पुराण वर्णन पर्व 63 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 22 | श्लोक 23 से 31 |श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 102 | श्लोक 103 से 114 | श्लोक 115 से 121 | श्लोक 122 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 153 | श्लोक 154 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 182 | श्लोक 183 से 192 | श्लोक 193 से 201 | श्लोक 202 से 221 | श्लोक 222 से 231 | श्लोक 232 से 244 | श्लोक 245 से 254 | श्लोक 255 से 271 | श्लोक 272 से 281 | श्लोक 282 से 293 | श्लोक 294 से 301 | श्लोक 302 से 311 | श्लोक 312 से 321 | श्लोक 322 से 331 | श्लोक 332 से 341 | श्लोक 342 से 351 | श्लोक 352 से 361 | श्लोक 362 से 371 | श्लोक 372 से 381 | श्लोक 382 से 393 | श्लोक 394 से 404 | श्लोक 405 से 412 | श्लोक 413 से 421 | श्लोक 422 से 431 | श्लोक 432 से 441 | श्लोक 442 से 451 | श्लोक 452 से 462 | श्लोक 463 से 475 | श्लोक 476 से 491 | श्लोक 492 से 501 | श्लोक 502 से 510
उत्तरपुराण पर्व 64
कुन्थुनाथ तीर्थकर तथा चक्रवर्ती का पुराण वर्णन पर्व 64 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 50 | श्लोक 51 से 55
उत्तरपुराण पर्व 65
अरनाथ तीर्थकर चक्रवर्ती, सुभौम चक्रवर्ती, नन्दिषेण बलभद्र, पुण्डरीक नारायण और निशुम्भ प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 65 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 34 | श्लोक 35 से 50 | श्लोक 51 से 64 | श्लोक 65 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 104 | श्लोक 105 से 117 | श्लोक 118 से 131 | श्लोक 132 से 143 | श्लोक 144 से 151 | श्लोक 152 से 161 | श्लोक 162 से 171 | श्लोक 172 से 184 | श्लोक 185 से 192
उत्तरपुराण पर्व 66
मल्लिनाथ तीर्थकर, पद्मचक्रवर्ती, नन्दिमित्र बलदेव, दत्त नारायण और बलीन्द्र प्रति-नारायण के पुराण का वर्णन पर्व 66 – श्लोक 1 से 13 | श्लोक 14 से 21 | श्लोक 22 से 32 | श्लोक 33 से 42 | श्लोक 43 से 52 | श्लोक 53 से 62 | श्लोक 63 से 71 | श्लोक 72 से 81 | श्लोक 82 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 111 | श्लोक 112 से 121 | श्लोक 122 से 125
उत्तरपुराण पर्व 67
मुनिसुव्रत तीर्थकर , हरिषेण चक्रवर्ती, राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण और रावण प्रतिनारायण के पुराण का वर्णन पर्व 67 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 23 | श्लोक 24 से 33 | श्लोक 34 से 43 | श्लोक 44 से 52 | श्लोक 53 से 64 | श्लोक 65 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 101 | श्लोक 102 से 112 | श्लोक 113 से 121 | श्लोक 122 से 135 | श्लोक 136 से 152 | श्लोक 153 से 162 | श्लोक 163 से 173 | श्लोक 174 से 181 | श्लोक 182 से 192 | श्लोक 193 से 203 | श्लोक 204 से 211 | श्लोक 212 से 222 | श्लोक 223 से 231 | श्लोक 232 से 242 | श्लोक 243 से 254 | श्लोक 255 से 273 | श्लोक 274 से 281 | श्लोक 282 से 292 | श्लोक 293 से 304 | श्लोक 305 से 321 | श्लोक 322 से 332 | श्लोक 333 से 343 | श्लोक 344 से 353 | श्लोक 354 से 370 | श्लोक 371 से 390 | श्लोक 391 से 401 | श्लोक 402 से 411 | श्लोक 412 से 426 | श्लोक 427 से 443 | श्लोक 444 से 461 | श्लोक 462 से 471 | श्लोक 472 से 473
उत्तरपुराण पर्व 68
राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण, सीता , रावण और अणुमान् के पुराण का वर्णन पर्व 68 – श्लोक 1 से 16 | श्लोक 17 से 30 | श्लोक 31 से 42 | श्लोक 43 से 50 | श्लोक 51 से 61 | श्लोक 62 से 71 | श्लोक 72 से 83 | श्लोक 84 से 92 | श्लोक 93 से 104 | श्लोक 105 से 123 | श्लोक 124 से 132 | श्लोक 133 से 141 | श्लोक 142 से 151 | श्लोक 152 से 163 | श्लोक 164 से 174 | श्लोक 175 से 184 | श्लोक 185 से 193 | श्लोक 194 से 203 | श्लोक 204 से 211 | श्लोक 212 से 221 | श्लोक 222 से 235 | श्लोक 236 से 252 | श्लोक 253 से 262 | श्लोक 263 से 276 | श्लोक 277 से 291 | श्लोक 292 से 302 | श्लोक 303 से 317 | श्लोक 318 से 332 | श्लोक 333 से 353 | श्लोक 354 से 364 | श्लोक 365 से 382 | श्लोक 383 से 401 | श्लोक 402 से 412 | श्लोक 413 से 422 | श्लोक 423 से 435 | श्लोक 436 से 452 | श्लोक 453 से 462 | श्लोक 463 से 472 | श्लोक 473 से 484 | श्लोक 485 से 493 | श्लोक 494 से 501 | श्लोक 502 से 515 | श्लोक 516 से 531 | श्लोक 532 से 542 | श्लोक 543 से 551 | श्लोक 552 से 560 | श्लोक 561 से 575 | श्लोक 576 से 585 | श्लोक 586 से 594 | श्लोक 595 से 604 | श्लोक 605 से 622 | श्लोक 623 से 631 | श्लोक 632 से 641 | श्लोक 642 से 651 | श्लोक 652 से 661 | श्लोक 662 से 672 | श्लोक 673 से 681 | श्लोक 682 से 691 | श्लोक 692 से 701 | श्लोक 702 से 711 | श्लोक 712 से 721 | श्लोक 722 से 732
उत्तरपुराण पर्व 69
नमिनाथ तीर्थंकर तथा जयसेन चक्रवर्ती के पुराण का वर्णन पर्व 69 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21 | श्लोक 22 से 31 | श्लोक 32 से 41 | श्लोक 42 से 51 | श्लोक 52 से 65 | श्लोक 66 से 82 | श्लोक 83 से 92
उत्तरपुराण पर्व 70
नेमिनाथ स्वामी के चरित में श्रीकृष्णकी विजय का वर्णन पर्व 70 – श्लोक 1 से 11 | श्लोक 12 से 21
उत्तरपुराण पर्व 71
नेमि चरित्र प्रकरण में श्रीकृष्ण, बलदेव, श्रीकृष्णकी पट्टरानियाँ आदि भवान्तरों का वर्णन
उत्तरपुराण पर्व 72
नेमिनाथ तीर्थंकर, पद्म नामक बलभद्र, कृष्ण नामक अर्धचक्रवर्ती, जरासन्ध प्रतिनारायण और ब्रह्मदत्त नामक सकल चक्रवर्ती के पुराणका वर्णन
उत्तरपुराण पर्व 73
पाश्र्वनाथ तीर्थंकर के पुराण का वर्णन
उत्तरपुराण पर्व 74
अन्तिम तीर्थंकर वर्धमान स्वामी, राजा श्रेणिक और अभयकुमार के चरित का वर्णन
उत्तरपुराण पर्व 75
चन्दना आर्यिका और जीवन्धर स्वामीका चरित वर्णन
उत्तरपुराण पर्व 76
राजा श्वेतवाहनके मुनिपद , अन्तिम केवली जम्बू स्वामी, प्रीतिंकर मुनि , उत्सर्पिणी अवसर्पिणी काल का विशिष्ट वर्णन
करते हुए कल्कियों का वर्णन , कल्किके पुत्र अजितंजयका , प्रलय काल का वर्णन , आगामी तीर्थकर आदि शलाकापुरुषोंका
वर्णन , महावीर भगवान् की शिष्य परम्परा
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उत्तरपुराण हिन्दी-भाषानुवाद
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