राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण, सीता , रावण और अणुमान् के पुराण का वर्णन पर्व 68 – श्लोक 1 से 16
मूल संस्कृत श्लोक . हिंदी अनुवाद . English translation of Uttar Puran parv 68- shlok 17 to 30
श्लोक ( Shlok ) 17 – 20
कृत्वा भवान्ते मन्दोदरीगर्भ समधिष्ठिता । भूकम्पादिमहोत्पातैस्तज्जन्मसमयोद्भवैः ॥ १७ ॥
विनाशो रावणस्येति नैमित्तिकवचः श्रुतेः । दशाननोऽतिभीतः सन्यन्त्र वचन पापिनीम् ॥ १८ ॥ त्यजेमामिति मारीचमाज्ञापयदसावभीः २ । सोऽपि मन्दोदरीगेहं गत्वा देवस्य देवि मे ॥१९॥ कर्मैवं निघृणस्यासीदिति तस्यै न्यवेदयत् । सापि देवनिदेशस्य नाहमस्मि निवारिका ॥ २० ॥
ऐसा निदान कर वह आयुके अन्तमें मन्दोदरीके गर्भमें उत्पन्न हुई। जब उसका जन्म हुआ तब भूकम्प आदि बड़े-बड़े उत्पात हुए उन्हें देख निमित्तज्ञानियोंने कहा कि इस पुत्रीसे रावणका विनाश होगा । यद्यपि रावण निर्भय था तो भी निमित्तज्ञानियोंके वचन सुनकर अत्यन्त भयभीत हो गया। उसने उसी क्षण मारीच नामक मन्त्रीको आज्ञा दी कि इस पापिनी पुत्रीको जहाँ कहीं जाकर छोड़ दो । मारीच भी रावणकी आज्ञा पाकर मन्दोदरीके घर गया और कहने लगा कि हे देवि, मैं बहुत ही निर्दय हूं अतः महाराजने मुझे ऐसा काम सौंपा है यह कह उसने मन्दोद्रीके लिए रावणकी आज्ञा निवेदित की-सूचित की। मन्दोदरीने भी उत्तर दिया कि मैं महाराजकी आज्ञाका निवारण नहीं करती हूँ ।। १७-२० ॥
“Having made such a Nidana (vengeful vow), at the end of her life, she was conceived in the womb of Mandodari. When she was born, severe and terrifying omens, including earthquakes, occurred. Witnessing these, the Nimittajnanis (astrologers/diviners of omens) predicted, ‘This daughter will bring about the destruction of Ravana.’
Even though Ravana was otherwise fearless, he became deeply terrified upon hearing the words of the astrologers. That very moment, he commanded a minister named Maricha, ‘Go and abandon this sinful daughter wherever you can.’ Upon receiving Ravana’s command, Maricha went to Mandodari’s palace and said, ‘O Queen, I am deeply ruthless, which is why the Maharaja has assigned me such a task.’ Saying this, he conveyed Ravana’s order to Mandodari. Mandodari replied, ‘I do not oppose the command of the Maharaja.'”17 – 20
श्लोक ( Shlok ) 21 – 25
प्रभूतद्रव्येण मन्जूषायां ३ निधाय ताम् । तत्सन्निधानपत्रेण सहोक्त्वेदं च तं मुहुः ॥ २१ ॥ मारीच मानसे स्निग्धः प्रकृत्या बालिकामिमाम् । बाधाविरहिते देशे निक्षियेति गलज्जले ॥२२॥विमृज्य लोचने तस्मै स्वतनूजां समर्पयत् । स नीत्वा मिथिलोद्याननिकटप्रकटे क्वचित् ॥ २३ ॥धरान्तःकृतमब्जूषो विषण्णो न्यवृतच्छुचा । तस्मिन्नेव दिने दृष्ट्वा गेहनिर्मापणं प्रति ॥ २४ ॥भूमिसंशोधने लाङ्गलाग्रलग्नां नियोगिनः । मन्जूषामेतदाश्चर्यमिति भूपमबोधयन् ॥ २५ ॥
यह कह कर उसने एक सन्दूकची में बहुत-सा द्रव्य रखकर उस पुत्रीको रक्खा, और मारीचसे बार-बार यह शब्द कहे कि हे मारीच ! तेरा हृदय स्वभावसे ही स्नेह पूर्ण है अतः इस बालिकाको ऐसे स्थानमें छोड़ना जहाँ किसी प्रकारकी बाधा न हो। ऐसा कह उसने जिनसे अश्रु झर रहे हैं ऐसे दोनों नेत्र पोंछकर उसके लिए वह पुत्री सौंप दी। मारीचने ले जाकर वह सन्दूकची मिथिलानगरीके उद्यानके निकट किसी प्रकट स्थानमें जमीनके भीतर रख दी और स्वयं शोकसे विषाद करता हुआ वह लौट गया। उसी दिन कुछ लोग घर बनवानेके लिए जमीन देख रहे थे, वे हल चलाकर उसकी नोंकसे वहाँकी भूमि ठीक कर रहे थे। उसी समय वह सन्दूकची हलके अग्रभागमें आ लगी। वहाँ जो अधिकारी कार्य कर रहे थे उन्होंने इसे आश्चर्य समझ राजा जनकके लिए इसकी सूचना दी ।। २१-२५ ॥
“Having said this, she (Mandodari) placed a vast amount of wealth and the infant daughter inside a small chest. She repeatedly entreated Maricha, saying, ‘O Maricha! Your heart is naturally full of compassion; therefore, leave this child in a place where she will face no harm.’ With these words, she wiped her tear-filled eyes and handed the daughter over to him.
Maricha took the chest and buried it underground in a conspicuous spot near the garden of the city of Mithila, then returned home, grieving and despondent. That very day, some men were inspecting the land to build a house; they were leveling the ground using a plow. Suddenly, the chest struck the tip of the plow. Considering this a great marvel, the officials overseeing the work immediately informed King Janaka.”21 – 25
श्लोक ( Shlok ) 26 – 27
सुरूपां वालिकां वीक्ष्य तदभ्यन्तरवर्तिनीम् । नृपस्तदवतारार्थ विलेखादवबुध्य सः ॥ २६ ॥तत्पूर्वापरसम्बन्धमेषा सीताभिधानिका । सुता भवेत्तवेत्येतां वसुधायै ददौ मुदा ॥ २७ ॥
राजा जनकने उस सन्दूकचीके भीतर रखी हुई सुन्दर कन्या देखी और पत्रसे उसके जन्मका सब समाचार तथा पूर्वापर सम्बन्ध ज्ञात किया । तदनन्तर उसका सीता नाम रखकर ‘यह तुम्हारी पुत्री होगी’ यह कहते हुए उन्होंने बड़े हर्षसे वह पुत्री वसुधा रानीकेलिए दे दी ।। २६-२७ ॥
“King Janaka looked inside the small chest and saw the beautiful infant girl, and through a letter enclosed within, he learned all the details of her birth and her past connections. Thereafter, naming her Sita, he handed the daughter over to Queen Vasudha with great joy, saying, ‘She shall be your daughter.'”26 – 27
श्लोक ( Shlok ) 28 – 30
वसुधा वसुधा ‘गेहे गुणयन्ती कलागुणान् । अवर्द्धयदिमां गूढां लङ्केशोऽपि न वेश्यमुम् ॥ २८ ॥वार्ता जनकयागस्य तस्मान्नात्रागमिष्यति । दास्यत्यवश्यं रामाय तां कन्यां मिथिलेश्वरः ॥ २९ ॥तत्कुमारौ प्रहेतव्याविति नैमित्तिकोक्तितः । राज्ञाखिलबलेनामा प्रहितौ रामलक्ष्मणौ ॥ ३० ॥।
रानी वसुधाने भूमिगृहके भीतर रहकर उस पुत्रीका पालन-पोषण किया है तथा उसके कलारूप गुणोंकी वृद्धि की है। यह कन्या इतनी गुप्त रखी गई है कि लङ्केश्वर रावणको इसका पता भी नहीं है। इसके सिवाय राजा जनक यज्ञ कर रहे हैं यह खबर भी रावणको नहीं है अतः वह इस उत्सवमें नहीं आवेगा। ऐसी स्थितिमें राजा जनक वह कन्या रामके लिए अवश्य देवेंगे । इसलिए राम और लक्ष्मण ये दोनों ही कुमार वहाँ अवश्य ही भेजे जानेके योग्य हैं। इस प्रकार निमित्तज्ञानी पुरोहितके कहनेसे राजा समस्त सेनाके साथ राम और लक्ष्मणको भेज दिया ॥ २८-३० ॥
“Queen Vasudha raised that daughter inside an underground palace (Bhumigriha) and nurtured the growth of her artistic skills and virtues. This maiden has been kept so well-hidden that even Ravana, the Lord of Lanka, has absolutely no knowledge of her existence. Furthermore, Ravana is also unaware that King Janaka is performing a Yajna (sacred ritual); therefore, he will not come to this celebration. In such a situation, King Janaka will certainly bestow that maiden upon Rama. For this reason, both princes, Rama and Lakshmana, must surely be sent there.’
Upon hearing these words from the Nimittajnani (seer of omens) priest, the King dispatched Rama and Lakshmana along with the entire army.”28 – 30
श्लोक 31 से 42
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राम बलभद्र, लक्ष्मण नारायण, सीता , रावण और अणुमान् के पुराण का वर्णन पर्व 68 – श्लोक 1 से 16 |
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