सोलह कारण विधान – कविवर श्री टेकचंद जी कृत
5. संवेग भावना पूजा
अडिल्ल
यो जग दुखभण्डार, रोगशोकै भर्यो, ताको लख भवि जीव, भयानक चित कर्यो। भवदुखतें भय खाय, विरक्ति तनतें करे, सो संवेगता थाप, जजों भव-तप हरे ।। ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्। ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम् ।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
(बेसरी छन्द)
क्षीरोदधि का जल ले आई, कनकझारि भर चित हरषाई। भाव संवेग पूज हों भाई, भव दुख फेर होय ना आई ।।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
चन्दन नीर थकी घस लाया, शुभ पातर धरि अति हरषाया। भाव संवेग पूज हों भाई, ताफल जग आताप नसाई।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
अक्षत मुक्ताफल सम प्यारे, हरष धारि पातर में धारें। भाव संवेग पूज हों भाई, ताफल अक्षय पद उपजाई।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
सुरतरु फूल लाय गंध धारी, माल करी शोभा अतिभारी। भाव संवेग पूज हों भाई, ताफल कामनाश हो जाई ।।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा।
काल अनादि जगत भरमाये, नानातन धरि अति अकुलाये। लखानसुख सब दुख का भारा, धर संवेगभाव जग न्यारा ।। पाप किये जिय नरक सिधायो, या तिर्यंची विर्षे दुख पायो। अब ओसर नीका है प्यारा, धर संवेगभाव जग न्यारा।। पुण्य उदय नर देव बनाया, तंह मनवांछित बहु सुख पाया। सो भी भये देख क्षयकारा, धर संवेगभाव जग न्यारा।। कौन महादुख जग के भाखे यह जिय इन्दी सुख अभिलाखे। तातें तों जान क्षयकारा, धर संवेगभाव जग न्यारा।।
दोहा
जग दुखरूप विचार, विरचे भवतें साधवा। जगसुख नाशि विचार, पूजों मैं संवेगता ।।
ॐ ह्रीं संवेगभावनायै पूर्णार्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।
English Meaning with Transliteration
5. संवेग भावना पूजा (Samvega Bhāvanā Pūjā):
Opening Verse
Transliteration:
Yo jaga duḥkha-bhaṇḍāra, roga-śokai bharyo,
Tāko lakha bhavi jīva, bhayānaka cita karyo।
Bhava-duḥkhateṁ bhaya khāya, virakti tanateṁ kare,
So saṁvegatā thāpa, jajoṁ bhava-tapa hare॥
English Meaning:
This world is filled with immense sorrow,
Overloaded with disease and grief.
When a soul realizes this dreadful state,
It develops detachment, and thus arises Samvega (spiritual urgency).
I establish this contemplation, which destroys the torments of worldly life.
Mantras:
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्।
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
Verse 1 – Offering of Water (जल अर्पण)
Transliteration:
Kṣīrodadhi kā jala le āī, kanak jhāri bhara cita haraṣāī।
Bhāva saṁvega pūja hoṁ bhāī, bhava duḥkha phera hoya nā āī॥
English Meaning:
Bringing pure water like that of the milk-ocean,
Poured from golden vessels with joyous heart,
I worship with the feeling of Samvega (spiritual urgency), O brother,
So that the sufferings of worldly existence never return.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 2 – Offering of Sandal (चंदन अर्पण)
Transliteration:
Candana nīra thakī ghasa lāyā, śubha pātara dhari ati haraṣāyā।
Bhāva saṁvega pūja hoṁ bhāī, tā phala jaga ātāpa nasāī॥
English Meaning:
Sandal paste, prepared with pure water,
Placed in a clean vessel with deep joy,
I worship with the feeling of Samvega, O brother,
Whose fruit removes the burning miseries of the world.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 3 – Offering of Rice (अक्षत अर्पण)
Transliteration:
Akṣata muktāphala sama pyāre, haraṣa dhāri pātara meṁ dhāre।
Bhāva saṁvega pūja hoṁ bhāī, tā phala akṣaya pada upajāī॥
English Meaning:
Rice grains, pure and dear like pearls,
With devotion, I place them in the vessel.
I worship with the feeling of Samvega, O brother,
By whose fruit the imperishable state of liberation is attained.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री संवेग भावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
6. त्याग भावना पूजा Tyaga Bhavana Puja
1. दर्शनविशुद्धि भावना पूजा | प्रत्येकार्घ्य | जयमाला | 2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा | 3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा | 4. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग भावना पूजा | 5. संवेग भावना पूजा | 6. त्याग भावना पूजा | 7. तपो भावना पूजा | 8. साधुसमाधि भावना पूजा | 9. वैयावृत्य भावना पूजा | 10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा | 11. आचार्यभक्ति भावना पूजा | 12. बहुश्रुतभक्ति भावना पूजा | 13 प्रवचनभक्ति भावना पूजा | 14. षट् आवश्यक भावना पूजा | 15. मार्गप्रभावना भावना पूजा | 16 प्रवचनवात्सल्य भावना पूजा | समुच्चय जयमाला