सोलह कारण विधान – कविवर श्री टेकचंद जी कृत
6. त्याग भावना पूजा
सोरठा
त्याग-भावना सार, भवदधि नौका जानिये। इमि लखि मनवच धार, थापन कर पूजों सही।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना । अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम् ।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना । अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम् ।
पद्धरि छन्द
जल कनकझारि धरि भाव लाय, अति उज्जवल क्षीरसमुद्र भाय। पूजों सु त्याग भावन महान, ताके फल जनमजरा न जान।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
चन्दन घसि निर्मल नीर लाय, धरि कनकपात्र में भक्ति भाय। पूजों सु त्याग भावन महान, ताके फल भवतप नाँहि जान।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
अक्षय मुक्ताफल से बखान, बिनखण्ड गन्ध उज्जवल महान। पूजों सु त्याग भावन सुभाय, ताफल अखण्ड पद होय आय।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
सम कलपतरु गंध वर्ण धार, तिनकी करि माला भक्ति सार। पूजों सु त्याग भावन सुभाय, ताके फल काम न जोर पाय ।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै पुष्पम् निर्वपामीति स्वाहा।
षट् रस नैवेद्य बनाय सार, धरि सुभय पात्र में हरष धार। पूजों सु त्याग भावन सुभाय, ताफलें क्षुधागद तुरत जाय।।
त्याग त्रिभुवन विर्षे, सार धर्म अंग है, त्याग के जोर तें, होय कर्मभंग है।
त्याग को देख का-सुर नरा धूजि हैं, त्याग को मैं जजों, और भवि पूज है।।।
त्यागफल उदयतें, होय है आय जी, इंद्र वा देव खग चक्रधर थाय जी।
मोक्ष ताही भवे, तथा कर्म तें लहे, मैं जजों त्यागभवि, जजों जिनधुनि कहे ।।
त्याग जग पूज्य है, त्यागधर पूज्य जी, त्यागतें अवधि मनपर्ज सब सूझ जी।।
त्याग तारे समुद्र, जगत अति दुद्धरा, मैं जजों त्याग को, और पूजो नरा।।
त्याग खोटे किये, कर्म को झट हरे, त्यागतें सुभट मन, और इन्द्री मरे।
त्याग ही मरण का, भय निवारे सही, मैं जजों त्याग को, मनवचन तन कही।।
दोहा
त्याग तरन तारन सही, त्याग जगत गुरु सोय। मैं पूजों मन वचन तन, त्याग भावना जोय।।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै पूर्णार्ध्यम्।
English Meaning with Transliteration
6. त्याग भावना पूजा (Tyāga Bhāvanā Pūjā):
Opening Verse
Transliteration:
Tyāga-bhāvanā sāra, bhavadadhi naukā jāniye।
Imi lakhi manavaca dhāra, thāpana kara pūjoṁ sahī॥
English Meaning:
The essence of Tyāga Bhāvanā (contemplation of renunciation)
Is like a boat to cross the ocean of worldly existence.
With this realization in mind, speech, and heart,
I establish and perform this worship with devotion.
Mantras:
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननम्।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः स्थापनम्।
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावना अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधापनम्।
Verse 1 – Offering of Water (जल अर्पण)
Transliteration (Paddhari Chhand):
Jala kanak jhāri dhari bhāva lāya, ati ujjvala kṣīra-samudra bhāya।
Pūjoṁ su tyāga bhāvana mahān, tāke phala janma-jarā na jāna॥
English Meaning:
With pure intent, I offer water in golden vessels,
As radiant as the milk-ocean itself.
I worship the great Tyāga Bhāvanā,
Whose fruit frees one from the cycle of birth and old age.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै जलम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 2 – Offering of Sandal (चंदन अर्पण)
Transliteration:
Candana ghasi nirmala nīra lāya, dhari kanaka-pātra meṁ bhakti bhāya।
Pūjoṁ su tyāga bhāvana mahān, tāke phala bhava-tapa nāṁhi jāna॥
English Meaning:
Sandal paste, prepared with pure water,
Is placed in golden vessels with devotion.
I worship the great Tyāga Bhāvanā,
Whose fruit removes the burning miseries of worldly life.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै चंदनम् निर्वपामीति स्वाहा।
Verse 3 – Offering of Rice (अक्षत अर्पण)
Transliteration:
Akṣaya muktā-phala se bakhān, binakhaṇḍa gandha ujjvala mahān।
Pūjoṁ su tyāga bhāvana subhāya, tā phala akhaṇḍa pada hoya āya॥
English Meaning:
Rice grains, compared to flawless pearls,
Radiant and fragrant without blemish,
I worship the noble Tyāga Bhāvanā,
Whose fruit brings the eternal state of liberation.
Mantra:
ॐ ह्रीं श्री त्यागभावनायै अक्षतान् निर्वपामीति स्वाहा।
7. तपो भावना पूजा Tapo Bhavana Puja
1. दर्शनविशुद्धि भावना पूजा | प्रत्येकार्घ्य | जयमाला | 2. विनय सम्पन्नता भावना पूजा | 3. शीलव्रतेष्वनतिचार भावना पूजा | 4. अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोग भावना पूजा | 5. संवेग भावना पूजा | 6. त्याग भावना पूजा | 7. तपो भावना पूजा | 8. साधुसमाधि भावना पूजा | 9. वैयावृत्य भावना पूजा | 10. अर्हद्भक्ति भावना पूजा | 11. आचार्यभक्ति भावना पूजा | 12. बहुश्रुतभक्ति भावना पूजा | 13 प्रवचनभक्ति भावना पूजा | 14. षट् आवश्यक भावना पूजा | 15. मार्गप्रभावना भावना पूजा | 16 प्रवचनवात्सल्य भावना पूजा | समुच्चय जयमाला