छहढाला का अर्थ और आध्यात्मिक संदेश
छहढाला जैन धर्म के लोकप्रिय और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथों में से एक है। इसके रचयिता कवि दौलतराम जी हैं। यह ग्रंथ जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को सरल, सहज और काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से आत्मा, कर्म, संसार, वीतरागता, सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र और मोक्ष जैसे विषयों को समझने के लिए छहढाला अत्यंत उपयोगी है।
छहढाला नाम का अर्थ
‘छहढाला’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—छह + ढाला।
यह रचना छह प्रमुख भागों या ढालाओं में विभाजित है। प्रत्येक ढाला आत्मा की वास्तविक स्थिति, संसार के स्वरूप, कर्मबंधन और मोक्षमार्ग से संबंधित किसी महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विषय को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करता है।
इसका उद्देश्य केवल धार्मिक पाठ करना नहीं है, बल्कि जीव को अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने और मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करना है।
मंगलाचरण
तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता
शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ, त्रियोग सम्हारिकैं ॥
अन्वयार्थ – (वीतराग) राग-द्वेष रहित (विज्ञानता) विशिष्ट ज्ञान केवलज्ञान (तीन भुवन में) तीनों लोकों में (सार) उत्तम वस्तु (शिवस्वरूप) आनन्द स्वरूप, और (शिवकार) मोक्ष प्राप्त कराने वाला है, उसे मैं (त्रियोग) तीन योगों को (सम्हारिकैं) सम्हाल करके (नमहुँ) नमस्कार करता हूँ।
अर्थ – वीतराग विज्ञानता अर्थात् रागद्वेष से रहित केवलज्ञान तीनलोक में सर्वोत्तम है। यही आनंद स्वरूप है और मोक्ष प्राप्त कराने वाला है अतः मैं (कवि दौलतराम) मन-वचन और काय को सम्हाल कर केवलज्ञान को नमस्कार करता हूँ ।
पहली ढाल
छंद 1 – ग्रन्थ का उद्देश्य
जे त्रिभुवन में जीव अनन्त, सुख चाहेँ दुखतैं भयवन्त ।
तातैं दुखहारी सुखकार, कहैं सीख गुरु करुणाधार ॥1 ॥
छंद 2 – गुरु शिक्षा सुनने का उपदेश और संसार में भ्रमण का कारण
ताहि सुनो भवि मन थिर आन, जो चाहो अपनो कल्यान ।
मोह-महामद पियो अनादि, भूल आपको भरमत वादि ॥2॥
छंद 3 – ग्रन्थ की प्रामाणिकता और निगोद के दुःख
तास भ्रमण की है बहु कथा, पै कछु कहूँ कही मुनि यथा।
काल अनन्त निगोद मँझार, बीत्यो एकेन्द्री-तन धार ॥3 ॥
छंद 4 – निगोद के दुःख और वहाँ से निकलने का क्रम
एक श्वास में अठदस बार, जन्म्यो मरयो भरयो दुखभार।
निकसि भूमि जल पावकभयो, पवन प्रत्येक वनस्पति थयो ॥ 4 ॥
छंद 5 – तिर्यंच गति में त्रस पर्याय की दुर्लभता उसके दुःख
दुर्लभ लहि ज्यों चिन्तामणी, त्यों पर्याय लही त्रसतणी।
लट पिपील अलि आदि शरीर, धरधर मस्यो सही बहुपीर ॥5 ॥
छंद 6 – तिर्यच गति में असैनी और सैनी पंचेन्द्रिय के दुःख
कबहुँ पंचेन्द्रिय पशु भयो, मन बिन निपट अज्ञानी थयो।
सिंहादिक सैनी है क्रूर, निबल-पशु हति खाये भूर ॥6॥
छंद 7 – तिर्यंच गति में पशुओं के और भी दुःख
कबहूँ आप भयो बलहीन, सबलनिकरि खायो अतिदीन।
छेदन भेदन भूख पियास, भार-वहन हिम आतप त्रास ॥ 7 ॥
छंद 8 – तिर्यंच गति में दुःखों की अधिकता और नरकगति प्राप्ति का कारण
बध-बंधन आदिक दुख घने, कोटि जीभौं जात न भने ।
अति संक्लेश-भावतैं मरयो, घोर श्वभ्र-सागर में परयो ॥ 8 ॥
छंद 9 – नरक की भूमि और नदीजन्य दुःख
तहाँ भूमि परसत दुख इसो, बिच्छू सहस डसै नहिं तिसो ।
तहाँ राधश्रोणित-वाहिनी, कृमिकुलकलित देह-दाहिनी ॥9॥
छंद 10 – नरक में सेमर वृक्ष, सर्दी और गर्मी के दुःख
सेमर-तरु- दल जुत असिपत्र, असि ज्यों देह विदारें तत्र ।
मेरु समान लोह गलि जाय, ऐसी शीत उष्णता थाय ॥10॥
छंद 11 – नरक में अन्य नारकियों, असुर कुमारों द्वारा उदीरित दुःख और प्यास के दुःख –
तिल-तिल करें देह के खण्ड, असुर भिडावै दुष्ट प्रचण्ड।
सिन्धु-नीरतें प्यास न जाय, तो पण एक न बूँद लहाय ।।11 ॥
छंद 12 – नरक में भूख, आयु और मनुष्य गति की प्राप्ति
तीन लोक को नाज जु खाय, मिटै न भूख कणा न लहाय।
ये दुख बहु सागरलौं सहै, करम जोगतैं नरगति लहै ॥ 12 ॥
छंद 13 – मनुष्य गति में गर्भ निवास और प्रसवजन्य दुःख
जननी उदर बस्यो नवमास, अंग-सकुचतै पाई त्रास ।
निकसत जे दुख पाये घोर, तिनको कहत न आवे ओर ॥ 13 ॥
छंद 14 – बाल्यावस्था, जवानी और बुढ़ापे के दुःख
बालपने में ज्ञान न लह्यो, तरुण समय तरुणीरत रह्यो ।
अर्धमृतक सम बूढ़ापनों कैसे रूप लखै आपनो ॥14॥
छंद 15 – देवगति में भवनत्रिक के दुःख
कभी अकाम निर्जरा करै, भवनत्रिक में सुर-तन धरै।
विषय चाह दावानल दह्यो, मरत विलाप करत दुख सह्यो ॥15 ॥
छंद 16 – देवगति में वैमानिक देवों के दुःख
जो विमानवासी हू थाय, सम्यग्दर्शन बिन दुख पाय।
तहँते चय थावर-तन धरै, यों परिवर्तन पूरे करै ॥16॥
छहढाला पहली ढाल छंद 1 व 2 | छंद 3 व 4 | छंद 5 व 6 | छंद 7 व 8 | छंद 9 व 10 | छंद 11 व 12 | छंद 13 व 14 | छंद 15 व 16 |
स्वाध्याय
छहढाला पहली ढाल पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
छंद 1 व 2 पर MCQ | छंद 3 व 4 पर MCQ | छंद 5 व 6 पर MCQ | छंद 7 व 8 पर MCQ
छंद 9 व 10 पर MCQ | छंद 11 व 12 पर MCQ | छंद 13 व 14 पर MCQ | छंद 15 व 16 पर MCQ