Prakrit_Stuti-Sangrah
लेखक – मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी
- णमोक्कार मंत (णमोकार मंत्र)
- पागद भावणा (प्राकृत भावना)
- सिद्धभत्ति (सिद्धभक्ति)
- चउवीस तित्थयर थुदि (चौबीस तीर्थंकर स्तुति)
- सिद्धभत्ति-2 (सिद्धभक्ति-2)
- सुदभत्ति (श्रुत भक्ति)
- आयरिय भत्ति (आचार्य भक्ति)
- पंचमहागुरु भत्ति (पंचमहागुरु भक्ति)
- गोम्मटेस भत्ति (गोमटेश भक्ति)
- वड्ढमाण सामि थुदि (वर्धमान स्वामी स्तुति)
- गोयम गणहर थुदि (गौतम गणधर स्तुति)
- भजन-पसण्ण करी थुदि (प्रसन्न करने वाली स्तुति)
- पडिग्गहण विही (पड़गाहन विधि)
- चउवीस जिणभत्ति (चौबीस जिनभक्ति)
- गोम्मटेस थुदि (गोम्मटेश स्तुति)
- चउवीस तित्थयर थवो (चौबीस तीर्थंकर स्तव)
- वीयराय भत्ति (वीतराग भक्ति)
- पागदधजगीद (प्राकृत ध्वज गीत)
- णवदेवदा थुदि (नवदेवता स्तुति)
- बारह भावणा (बारह भावना)
- सुद पंचमी पूया (श्रुत पंचमी पूजा)
- सुयपंचमीथुदि (श्रुत पंचमी स्तुति)
- णंदीसर भत्ति (नंदीश्वर भक्ति)
- जम्मकल्लाणभत्ति (जन्म कल्याण भक्ति)
- णिव्वाणकल्लाणभत्ति (निर्वाण कल्याण भक्ति)
- जिणवाणी थुदि (जिनवाणी स्तुति)
Prakrit_Stuti-Sangrah
लेखक – मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी
