समापन व सम्मान समारोह
श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति, भारत के तत्वावधान में श्री दिगम्बर जैन महिला महासमिति राजस्थान अंचल एवं संयुक्त महिला सम्भाग के सहयोगकर्त्ता में दिनांक 17 से 28 मई, 2026 तक अपार सफलता के साथ आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का समापन व सम्मान समारोह

बारह दिवसीय इस संस्कारमय शिविर में प्रतिभागियों को जैन धर्म, श्रमण संस्कृति, नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक जीवनशैली एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित विविध विषयों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों में धार्मिक चेतना, संस्कारों के प्रति आस्था तथा समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का विकास हुआ। इस शिविर में जयपुर शहर के 63 दिगम्बर जैन मंदिरों में पखवाड़े भर तक संस्कार शिक्षण गतिविधियाँ संचालित की गईं। समापन समारोह संस्थान परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें सैकड़ों शिविरार्थियों, अभिभावकों एवं समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर 2026 के सफल संचालन, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं एवं संस्कारमय गतिविधियों के लिए जयपुर के आठ मंदिरों को “श्रेष्ठ मंदिर सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले मंदिरों में राधा निकुंज मंदिर, अम्बाबाड़ी मंदिर, वरुण पथ मंदिर (मानसरोवर), एस.एफ.एस. मंदिर (मानसरोवर), थड़ी मार्केट मंदिर (मानसरोवर), महारानी फार्म गायत्री नगर मंदिर, धावास मंदिर तथा संघीजी का मंदिर (मनिहारों का रास्ता) शामिल रहे।
इन मंदिरों ने शिविर के दौरान बच्चों को संस्कार, संस्कृति एवं धर्म से जोड़ने में उल्लेखनीय योगदान दिया तथा विभिन्न शिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्मान प्राप्त करने वाले मंदिरों के प्रतिनिधियों को समारोह में स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर अभिनंदित किया गया।

शिविर के समापन अवसर पर आयोजित समापन एवं सम्मान समारोह में प्रशिक्षकों, सहयोगकर्ताओं, आयोजकों तथा प्रतिभागियों का सम्मान किया गया। समारोह में वक्ताओं ने श्रमण संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में ऐसे शिक्षण शिविरों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज निर्माण की एक प्रभावी पहल बताया।

समारोह का वातावरण उत्साह, श्रद्धा एवं गौरव से परिपूर्ण रहा। सभी प्रतिभागियों ने शिविर से प्राप्त ज्ञान एवं संस्कारों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। इस प्रकार श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

मुख्य अतिथि सांसद श्रीमती मंजू शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे संस्कारमूलक आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक विकास और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं जैन मूल्यों से जोड़ने के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

समारोह में विभिन्न मंदिरों के विद्यार्थियों ने अपने शिविर अनुभव साझा किए तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी का मन मोह लिया। विशेष रूप से विवेक विहार मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक “संतों की सुरक्षा, धर्म की रक्षा” को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में शिविर संचालन में योगदान देने वाले विद्वानों एवं विदुषियों का सम्मान किया गया। साथ ही चित्रकला, वक्तृत्व, धार्मिक ज्ञान, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 विद्यार्थियों को “रत्नाकर अवॉर्ड” प्रदान कर सम्मानित किया गया। इष्टोपदेश ग्रन्थ मै श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर , सिविल लाइंस से श्रीमती किरण बगड़ा ने रत्नाकर अवॉर्ड प्राप्त किया |

इस अवसर पर विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 विद्यार्थियों को “रत्नाकर अवॉर्ड” प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त विद्यार्थियों ने शिविर से प्राप्त संस्कारों एवं अपने जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों को साझा किया।
छहढाला विषय में दुर्गापुरा निवासी आर्टिस्ट शिखा जैन को रत्नाकर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि शिविर के प्रशिक्षण ने उनके जीवन-दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। अब वे विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखती हैं कि उनकी सोच और वाणी से किसी प्रकार की हिंसा न हो। उन्होंने कहा कि संयम, संतोष और क्षमाशीलता का भाव उनके जीवन में बढ़ा है। पहले वे कई बार अपनी गलती स्वीकार करने से संकोच करती थीं, लेकिन अब छोटी से छोटी भूल होने पर भी सहजता से क्षमा मांग लेती हैं, जिससे संबंधों में मधुरता आती है। उन्होंने यह भी बताया कि अब उन्होंने मोबाइल का उपयोग भी काफी सीमित कर दिया है।

इसी प्रकार रत्नकरण्डक श्रावकाचार विषय में मधुबन कॉलोनी, टोंक फाटक निवासी सरिता जैन को रत्नाकर अवॉर्ड प्रदान किया गया। सरिता ने बताया कि शिविर के प्रशिक्षण से उनमें आत्मविश्वास का विकास हुआ है तथा कर्म सिद्धांत की गहरी समझ बनी है। अब उन्हें यह अनुभव होने लगा है कि जीवन में प्राप्त होने वाले फल व्यक्ति के कर्मों के अनुसार मिलते हैं, जिससे दूसरों को दोष देने की प्रवृत्ति समाप्त हुई है। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें क्रोध आता है, तो स्वयं को शांत कर णमोकार मंत्र का स्मरण करने लगती हैं, जिससे मन में शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

इन अनुभवों ने स्पष्ट किया कि श्रमण संस्कार शिक्षण शिविर केवल धार्मिक ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मानुशासन, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी संस्कारों का प्रभावी मंच भी है।

संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष शीला डोड्या ने बताया कि इस वर्ष देशभर में दो हजार से अधिक स्थानों पर श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी को जैन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जीवन-दृष्टि से जोड़ना है।

उत्साह, श्रद्धा और संस्कारों से ओत-प्रोत इस समारोह के साथ श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर 2026 का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास तथा समाज में सांस्कृतिक जागरूकता के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
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स्मारिका – जयपुर दिगम्बर जैन मन्दिर परिचय – श्री दिगम्बर जैन मंदिर महासंघ, जयपुर